
पिछले कुछ वर्षों से ‘१४ फरवरी’ को ‘वैलेंटाइन डे’ अर्थात ‘प्रेम दिवस’ के रूप में मनाते हैं । युवाओ, क्या वास्तविक प्रेम एक दिन का ही होता है ? ‘वैलेंटाइन डे’ का प्रचलन अब सर्वत्र बढ रहा है । इस पश्चिमी कुप्रथा को रोकने हेतु यह प्रबोधन ! ईसाईयों द्वारा भी नकारा गया ‘वैलेंटाइन डे’ क्योें मनाते हैैं ?
प्राचीन रोम में मूर्तिपूजक संस्कृति में ‘१३ से १५ फरवरी’ की अवधि में ‘ल्यूपरकैलिया’ नामक ‘प्रजनन उत्सव’ मनाया जाता था । इन मूर्तिपूजकों के ‘ईसाईकरण’ हेतु संत वैलेंटाइन के नाम से आरंभ किया गया ‘वैलेंटाइन डे’, वर्ष १९६९ में ‘रोमन कैथोलिक चर्च’ की दिनदर्शिका (कैलेंडर) से इसलिए निकाला गया क्योंकि, कथित ‘संत वैलेंटाइन’ के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं था ।

हिन्दू युवतियो, ‘लव जिहाद’ के संकट को पहचानें !
‘लव जिहाद’ हिन्दू युवतियों को प्रेमजाल में फांसकर, उन्हें धर्मांतरित करने तथा उनकी हत्या करने का षड्यंत्र है । श्रद्धा वालकर समान सहस्रों युवतियां उसका शिकार हो रही हैं । ‘वैलेंटाइन डे’ के निमित्त हिन्दू युवतियों को प्रेमजाल में फांसने हेतु जिहादी द्वारा गुलाब का फूल, शुभकामनापत्र अथवा उपहार देत हैं । हिन्दू युवतियो, धर्मभ्रष्ट करनेवाले ‘लव जिहाद’ के संकट को पहचानो और सावधान रहो !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?