हरियाणा के एक सरपंच का विधान

हिसार (हरियाणा) – डेढ करोड रुपए खर्च करने के उपरांत मैं सरपंच बना हूं । इस कारण मुझे ‘राइट टू रिकॉल’ का (जनप्रतिनीधि को वापस बुलाने का अधिकार) दिखानेवालों को वर्ष २०२४ में पीछे भेजना पडेगा, ऐसा विधान यहां के हांसी भाग के सरपंच ने किया । उनका एक वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ है । यह वीडियो १५ जनवरी को राज्य के पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली के विरोध में आयोजित किए गए एक कार्यक्रम का है ।

संपादकीय भूमिकाचुनाव जीतने के लिए पानी की भांति पैसा बहाना पडता है, यह देश के प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञात है । पैसा बांटे बिना मत नहीं मिलता, यह भी ज्ञात है । यही यह सरपंच बता रहा है ! सरपंच होने के लिए डेढ करोड रुपए व्यय (खर्च) करने पडते हैं, तो नगरप्रमुख, विधायक और सांसद बनने के लिए कितने रुपए खर्च करने पडते होंगे, इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते ! |
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