संगीत प्रशिक्षक एवं छात्रों की ओर से अच्छा प्रत्युत्तर

देहली – यहां के केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित ‘कथक केंद्र’ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की संगीत समन्वयक कु. तेजल पात्रीकर (आध्यात्मिक स्तर ६२ प्रतिशत) ने ‘संगीत एवं नृत्य की ओर देखने का आध्यात्मिक दृष्टिकोण’ विषय पर प्रस्तुत किए गए शोधकार्य का अच्छा प्रत्युत्तर मिला । यह कार्यक्रम २१ अक्टूबर २०२२ को आयोजित किया गया था ।
आरंभ में कथक केंद्र की कथक गुरु श्रीमती मालती श्याम, गायन गुरु श्री. ब्रिजेश मिश्रा एवं कु. तेजल पात्रीकर के हस्तों दीपप्रज्वलन किया गया । इस कार्यक्रम में इस कथक केंद्र में गायन, वादन एवं नृत्य सीखनेवाले छात्र तथा उन्हें शिक्षा देनेवाले कुछ गुरुजन उपस्थित थे । इस कार्यक्रम का ‘फेसबुक’ के द्वारा सीधा प्रसारण किया गया, उसका भी अनेक दर्शकों ने लाभ उठाया । इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के निदेशक श्री. सुमन कुमार ने किया ।
१. कु. तेजल पात्रीकर ने महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय द्वारा गायन, वादन एवं नृत्य के विषय में विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों के आधार से किए गए शोधात्मक प्रयोगों की जानकारी दी ।
२. इसके साथ ही उन्होंने कौन-कौनसे प्रकार के प्रस्तुतीकरण से कलाकारों एवं दर्शकों का सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभामंडल बढता है, उसका विश्लेषण भी किया । अंत में उन्होंने यह भी बताया कि स्वयं का प्रभामंडल निरंतर टिकाए रखने के लिए कलाकार को प्रतिदिन साधना करना भी आवश्यक है ।
कुछ छात्रों द्वारा व्यक्त किए हुए विशेषतापूर्ण अभिमतकु. तेजल दीदी में यदि इतनी सकारात्मक ऊर्जा है, तो उनके गुरुदेवजी में (परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी में) कितनी होगी, इसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती ! – कु. मनोहार जोशी आज यहां संगीत के विषय में जो कार्यशाला हुई, इस प्रकार यहां पहली बार ही हो रही है । इसमें हमें प्रभामंडल के विषय में जानकारी मिली । जब हम अध्यात्म की ओर मुडते हैं, तब पहले आंसू बहने लगते हैं (भावजागृति होती है) । इस विषय से भी हमें इतनी सकारात्मक ऊर्जा मिलने का प्रतीत हो रहा है कि केवल उसी से हमारी बहुत भावजागृति हो रही है । कु. तेजल दीदी में ही यदि इतनी ऊर्जा है, तो उनके गुरुदेवजी में वह कितनी होगी, इसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती । (यह बताते समय कु. मनोहार की भावजागृति हुई ।) हमें प्रभामंडल का विषय समझ आए; इसलिए भगवान ने ही कु. तेजल को यहां भेजा ! – श्री. अनुराग आज का विषय सुनने से कुछ समय पूर्व ही मैं और मेरे मित्र प्रभामंडल के विषय में चर्चा कर रहे थे तथा आज के विषय में भी यही विषय ज्ञात हुआ । इससे ‘हमें यह विषय समझ में आए, इसलिए भगवान ने ही कु. तेजल को यहां भेजा है’, ऐसा लगता है । कु. तेजल की ओर देखकर उनमें विद्यमान सादगी, सहजता एवं उनमें स्थित सकारात्मकता समझ में आती है । उनकी भांति हम में यदि १० प्रतिशत भी सकारात्मकता आई, तो हम जीवन में बहुत आगे बढ सकेंगे’, ऐसा लगता है । केवल परिश्रम ही न उठाते हुए साधना ही करनी चाहिए, यह आज मुझे सीखने के लिए मिला । |
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