
पनवेल (महाराष्ट्र) – तत्त्वनिष्ठा, आज्ञापालन, स्थिरता, नम्रता, अंतर्मुखता, समर्पणभाव से सेवा करना आदि अनेक गुणरत्नों का खजाना, मूलतः तिवरे (तालुका राजापुर, जिलहा रत्नागिरी) एवं वर्तमान में सनातन के देवद आश्रम में निवास कर रहीं सुश्री (कु.) रत्नमाला दळवी ६ मार्च को सनातन के ११८ वें समष्टि संतपद पर विराजमान हुईं । सनातन के देवद स्थित आश्रम में हुए भावसमारोह में सनातन की ६९ वीं संत पू. (श्रीमती) अश्विनी पवार ने यह शुभवार्ता घोषित की । अनेक दिन साधक इस क्षण की उत्कण्ठा से राह देख रहे थे, इसलिए सभी को आनंद हुआ और परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त हुई !
प्रत्येक सेवा दायित्व से संभालनेवालीं सुश्री (कु.) रत्नमाला दळवी का सम्मान पू. (श्रीमती) अश्विनी पवार ने भेंटवस्तु देकर किया । इस भावसमारोह में देवद आश्रम के सद्गुरु, संत एवं साधक उपस्थित थे । इस भावसमारोह में पू. (सुश्री) रत्नमाला दळवीजी के रिश्तेदार ‘ऑनलाइन’ सहभागी हुए थे ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?