हिन्दू राष्ट्र की तेजोमय संकल्पना को नष्ट करने हेतु हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार किया जा रहा है, इस सभी दुष्प्रचार का विरोध करना हम हिन्दुओं का कर्तव्य है । – पू. नीलेश सिंगबाळ, धर्मप्रचारक, हिन्दू जनजागृति समिति

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – मंदिरों पर तथा संत-महंतों पर विविध प्रकार से हो रहे आघातों का संगठित विरोध करने हेतु प्रति माह पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत के विविध क्षेत्रों से मंदिर न्यासी, पुजारी और मंदिरों से जुडे हिन्दुओं की ऑनलाइन मासिक बैठक का आयोजन हिन्दू जनजागृति समिति के माध्यम से किया जाता है ।
२८ अगस्त को संपन्न हुई इस बैठक में उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन करते हुए हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक संत पू. नीलेश सिंगबाळजी ने कहा कि ‘समाज में व्याप्त असामाजिक तत्त्व हिन्दू धर्म के विषय में द्वेषभावना को प्रकट करने हेतु हिन्दू देवी-देवताओं का अनादर करते हैं । खरे संतों ने बताया है कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना वर्ष २०२३ में होने ही वाली है । इसमें हमें हमारे क्षेत्र में हिन्दू राष्ट्र के लिए कटिबद्ध होकर अपना कर्तव्य निभाना है । इस कार्य में हिन्दुओं को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक स्तर के साथ आध्यात्मिक बल की प्राप्ति के लिए उपासना भी करनी है ।
इसमें असम राज्य सरकार द्वारा मंदिरों और पुजारियों के लिए अनुदान देने के निर्णय की प्रशंसा कर आजमगढ से जुडे श्री. अनिल गिरी ने बताया कि ‘यह निर्णय पूरे देश मे लागू होना चाहिए, इस मांग को लेकर सभी को कृतिशील होना चाहिए, मैं समिति के साथ हूं ।’
इस ऑनलाइन मासिक बैठक में उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्व भारत एवं पूर्वोत्तर भारत के मंदिरों से २० हिन्दू धर्मप्रेमी जुडे थे ।
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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