२०वीं शताब्दी की उर्दू लेखिका इस्मत चुगतई की आत्मकथा में निहित हिन्दूविरोधी सूत्रों का बीबीसी द्वारा प्रसारण !

नई देहली – उर्दू लेखिका इस्मत चुगतई ने अपनी जीवनी में यह लिखा है कि फल, दालमोठ (तेल अथवा घी में तली हुई दाल) एवं बिस्कुटों में स्पर्श करने जैसा कुछ नहीं था; इसलिए मैने श्रीकृष्ण जयंती के दिन मेरी हिन्दू सहेली सुशी के साथ धोखाधडी कर उसे मांस खिलाती थी । उससे मुझे शांति मिलती थी । ‘बीबीसी’ समाचार जालस्थल ने श्रीकृष्ण जयंती के उपलक्ष्य में भारतीय उर्दू लेखिका इस्मत चुगतई द्वारा लिखित जीवनी ‘कागजी है पैरहन’ में अपने बचपन की स्मृतियां उद्धृत की हैं । (‘बीबीसी’ हिन्दू धर्म एवं देवताओं का खुलेआम अनादर करता है । उसके लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पवित्र दिन चुनकर विश्व की विस्मृति में खो चुकी २० वीं शताब्दी की एक लेखिका की जीवनी में निहित ऐसे सूत्रों को प्रसारित करने की क्या आवश्यकता थी ? हिन्दुओं को ऐसी ‘बीबीसी’ का बहिष्कार ही करना चाहिए ! – संपादक)
उर्दू नोवेलिस्ट इस्मत चुगतई लिखती हैं कि उनके घर में टट्टी का अहाता बनाकर उसके पीछे बकरे काटे जाते थे और उसे कई दिनों तक बाँटा जाता था।https://t.co/1a1pQWQkL6
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) September 2, 2021
इस्मत चुगतई ने कहा है कि,
१. बकरी ईद के दिन मेरे घर में बकरों का कत्ल किया जाता था और उस मांस का कई दिनों तक वितरण किया जाता था ।
२. हिन्दू लोग श्रीकृष्ण जयंती का त्योहार के दिन सर्वत्र खाद्यपदार्थों की सुगंध फैलती थी । उसके कारण मुझे हिन्दुओं के घर जाने की इच्छा होती थी । एक दिन मैं सुशी के आंगन में गई । वहां पूजा के समय मुझे भी तिलक लगाया । मेरे माथे पर तिलक होने पर मैं सीधा पूजाघर गई और वहां चांदी के पलने में रखी हुई भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति चुराई; परंतु यह बात सुशी की दादी के ध्यान में आई । उसने मुझे घर से बाहर निकाला । (इससे हिन्दुओं को अपने घरों में किसे प्रवेश देना चाहिए, इसे ध्यान में लेना चाहिए ! – संपादक)
३. कई वर्ष उपरांत मैं अलीगढ से आगरा लौटी, तब मैं सुशी के हलदी के कार्यक्रम में गई थी । उस समय में सुशी के कक्ष में गई । वहां श्रीकृष्ण का मंदिर था । मैं मुसलमान हूं और इस्लाम में मूर्तिपूजा हराम है । (ऐसा होने के कारण ही विगत १ सहस्र वर्ष से भारत में धर्मांधों ने हिन्दुओं के देवताओं की मूर्तियां तोडीं, मंदिरों को गिराया और धर्म का बार-बार अनादर किया गया । धर्माभिमानशून्य हिन्दू इस वास्तविकता का कब संज्ञान लेंगे ? – संपादक) (४.९.२०२१)
(और इनकी सुनिए…) “हिन्दी तथा उर्दू भारत की भाषाएं हैं, जबकि संस्कृत बाहर से आई है ।” – Congress MP Mohammad Javed
(और इनकी सुनिए…) ‘मैं सोनम वांगचुक से ‘थ्री इडियट्स’ चलचित्र से पूर्व मिला ही नहीं था !’ – Amir Khan
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