परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

पूर्व की पीढियों में वैचारिक मतभेद (जनरेशन गैप) नहीं था । प्रत्येक पीढी पूर्व की पीढियों से समरस होती थी । दादाजी, परदादाजी, पोते, परपोते एक साथ रहते थे । हिन्दुओं ने पश्चिमी संस्कृति को अपनाया, इस कारण २ पीढियों में अर्थात माता-पिता एवं बेटे-बहू भी एक-दूसरे के साथ समरस नहीं हो सकते । अब पति-पत्नी की भी आपस में नहीं बनती । विवाह के उपरांत कुछ ही समय में उनका विवाह-विच्छेद हो जाता है !’
– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों को किया गया अनमोल मार्गदर्शन !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की विभिन्न कृतियों से प्रक्षेपित स्पंदनों का अध्ययन
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के माथे पर अंकित कमल सुस्पष्टता से दिखाई देने का कारण !
संतों के जन्मदिन पर ही भारत तथा बंगाल स्वतंत्र होने का एक दैवी संकेत ।
राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के कार्य को प्रत्येक हिन्दू तक पहुंचाना आवश्यक ! – कुमार चेलप्पन, ज्येष्ठ पत्रकार