परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘संघर्ष कर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम इतिहास में युगों-युगों के लिए अजर-अमर हो जाएगा; जबकि अहिंसावादियों का नाम ४०-५० वर्षों में पूर्णत: भुला दिया जाएगा ।’
– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की विभिन्न कृतियों से प्रक्षेपित स्पंदनों का अध्ययन
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के माथे पर अंकित कमल सुस्पष्टता से दिखाई देने का कारण !
‘श्री गुरु पर श्रद्धा’, यही भवसागर से पार होने की एकमात्र गुरुकुंजी !
संतों के जन्मदिन पर ही भारत तथा बंगाल स्वतंत्र होने का एक दैवी संकेत ।
राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के कार्य को प्रत्येक हिन्दू तक पहुंचाना आवश्यक ! – कुमार चेलप्पन, ज्येष्ठ पत्रकार
ग्रंथवाचन एवं ग्रंथों के लिए चिन्हित कतरनों से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का ध्यान में आया ईश्वरत्व !