कहां आधुनिक चिकित्सकीय शास्त्र को श्रेष्ठ मानकर आयुर्वेद को न्यून माननेवाले भारत के कथित विज्ञानवादी, तो कहां आयुर्वेद पर शोधकार्य कर उसका लाभ अपने देश को कराने का प्रयास करनेवाला ब्रिटेन ! इससे ‘गांव का जोगी जोगडा !’ यही प्रमाणित होता है !

नई दिल्ली – भारत में हुए अध्ययन से, अश्वगंधा से बनाए जानेवाली आयुर्वेदिक औषधियों का कोरोना रोगियों को अच्छा लाभ प्रमाणित हुआ है । भारत में इस औषधि को मिली सफलता के उपरांत, अब पहली बार इस औषधि पर शोध किया जानेवाला है । इसके लिए भारत एवं ब्रिटेन के मध्य एक अनुबंध हुआ है ।
१६ माह तथा १०० से भी अधिक बैठकें होने के उपरांत, आयुष मंत्रालय के अधीन ‘भारतीय आयुर्वेद संस्था’ एवं ब्रिटेन स्थित ‘लंडन स्कूल ऑफ हाइजीन एन्ड ट्रापिकल मेडिसिन’ ने ब्रिटेन के ३ शहरों में स्थित कोरोना रोगियों पर इस औषधि का परीक्षण कर अध्ययन करना सुनिश्चित किया है । अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्था की निदेशक तथा इस परियोजना की सहसंयोजक, डॉ. तनुजा मनोज नेसारी ने कहा, “आनेवाले ९० दिनों में ब्रिटेन के लिसेस्टर, बर्मिंगहैम एवं लंडन में स्थित कोरोना के २ सहस्र रोगियों पर इस औषधि का परीक्षण किया जाएगा और उसके उपरांत ९० दिनों तक तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा । भारत में अश्वगंधा औषधि के अच्छे परिणाम दिखाई दिए हैं । कोरोना के दीर्घकालीन लक्षणों को न्यून बनाने में इस औषधि का अच्छा परिणाम होने से कोरोना की चिकित्सा के अंतर्गत यह एक अच्छा विकल्प सिद्ध हो सकता है ।”
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