
एक बार मैंने प.पू. डॉक्टरजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी) से कहा, ‘‘आपके मूल स्वरूप को (आपके दैवी अवतार को) हम पहचान नहीं सकते । हमारे लिए वह कठिन ही है ।’’ इस पर प.पू. डॉक्टरजी स्मित मुस्कान के साथ मधुर हंस दिए । मुझे लगता था, ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी एक अवतार हैं । अत: मुझे उनके मूल स्वरूप को जानने की क्षमता चाहिए ।’ परात्पर गुरु पांडे महाराजजी व योगतज्ञ दादाजी वैशंपायनजी जैसे उच्च कोटि के संतों ने वास्तव में प.पू. डॉक्टरजी के मूल दैवी स्वरूप को पहचाना था । परात्पर गुरु पांडे महाराजजी ज्ञानमार्गी थे । परात्पर गुरु पांडे महाराजजी और प.पू. डॉक्टरजी के मध्य दूरभाष पर संवाद होता था । उस समय परात्पर गुरु पांडे महाराजजी द्वारा प.पू. डॉक्टरजी की महानता को रेखांकित करनेवाले कुछ प्रसंग आगे दिए हैं ।

परात्पर गुरु पांडे महाराजजी ने ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी साक्षात् वेदपुरुष हैं’, ऐसा कहना !
परात्पर गुरु पांडे महाराजजी को गीता और वेदों के अनेक श्लोक कंठस्थ थे । आध्यात्मिक विषयों पर संवाद करते समय परात्पर गुरु पांडे महाराजजी गीता के अध्याय प.पू. डॉक्टरजी को सुनाते थे । उस समय प.पू. डॉक्टरजी परात्पर गुरु पांडे महाराजजी से बोले, ‘‘महाराज, आपने गीता और वेदों का कितना अध्ययन किया है ! आपको कितना ज्ञान है ! मैंने तो कभी ऐसा अध्ययन नहीं किया और मुझे इसमें से कुछ भी नहीं आता ।’’ इस पर महाराजजी ने कहा, ‘‘आपको वेदों के अध्ययन की आवश्यकता नहीं है । आप साक्षात वेदपुरुष हैं । आप जो भी बोलेंगे, उससे वेद सिद्ध होते हैं !’’
– श्री. अतुल पवार, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१४.४.२०२५)
१. परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की निद्रावस्था एवं क्षीरसागर में शयन करते शेषशायी श्रीविष्णु !

परात्पर गुरु पांडे महाराजजी ९० वर्ष की आयु में भी भोर से रात्रि तक अत्यंत उत्साही रहते थे । एक बार प.पू. डॉक्टरजी ने परात्पर गुरु पांडे महाराजजी से कहा, ‘‘महाराज, आप इस आयु में भी दिनभर कार्यरत रहकर कितने उत्साही रहते हैं ! मैं तो थकान के कारण लेटा रहता हूं ।’’
इस पर परात्पर गुरु पांडे महाराजजी ने कहा, ‘‘भगवान के लिए निद्रा लेना आवश्यक है । शेषशायी विष्णु भी क्षीरसागर में शयन करते हैं । भगवान की निद्रावस्था की ऊर्जा के बल पर ही यह संसार कार्यरत रहता है ।
भगवान यदि सदैव जागृतावस्था में रहे, तो उनका चैतन्य और ऊर्जा यह संसार सहन नहीं कर पाएगा, संभाल नहीं पाएगा ।’’
इस उदाहरण के माध्यम से ‘परात्पर गुरु पांडे महाराजजी ने प.पू. डॉक्टरजी का कितना सुंदर वर्णन किया है !’, यह ध्यान में आता है ।
– श्री. अतुल पवार, रामनाथी, गोवा.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !