गर्मी की ऋतु पर भारत का उपहास, तो यूरोप के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित की जा रही है !

तेज गर्मी की लहर पर वैश्विक प्रसार माध्यमों के दो दृष्टिकोण पर पोलैंड की महिला की तीव्र भर्त्सना l

नई दिल्ली – मैं संप्रति पोलैंड में हूं, जहां तापमान की कभी कल्पना भी नहीं की गई थी, ऐसे ३५ अंश सेल्सियस पर पहुंच गया है । जब भारत ग्रीष्म का उत्ताप सहन करता है, तो उसे ‘असफलता’ कहा जाता है तथा जब पाश्चात्य जगत इस उत्ताप को सहन करता है, तो उसे ‘त्रासदी’ कहा जाता है, इन शब्दों में भारत में निवास करने वाली पोलैंड की अग्निएस्का हडाला नामक महिला ने जलवायु संकट के समाचारों पर वैश्विक प्रसार माध्यमों के दो दृष्टिकोण की तीव्र भर्त्सना की । उन्होंने ‘इंस्टाग्राम’ पर एक वीडियो प्रसारित किया है । इस वीडियो में वे साडी परिधान किए हुए हैं एवं उनके मस्तक पर बिंदी सुशोभित है ।

भारत का दुःख असफलता, यूरोप का दुःख त्रासदी !

हडाला ने उल्लेख किया कि, यूरोप में विद्यालय बंद किए जा रहे हैं, बाह्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, मार्ग एवं रेल पटरियां पिघल रही हैं, शीतलन यंत्रों (एसी) की बढती मांग के कारण विद्युत व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है । यूरोप के अनेक घरों तथा कार्यालयों में भारत के समान एसी या साधारण पंखे भी उपलब्ध नहीं हैं । भारत के अनेक क्षेत्रों में ४० अंश सेल्सियस तापमान होना एक सामान्य विषय है । अब विचार कीजिए ! भारत में ३५ अंश तापमान अनेक स्थानों पर सुखद माना जाता है । भारत का ग्रीष्मकाल नियमित रूप से ४० अंश से आगे चला जाता है तथा कुछ क्षेत्रों में तो यह ५० अंश सेल्सियस तक पहुंच जाता है । तथापि जब भारत के समक्ष कोई चुनौती उपस्थित होती है, तो विदेशी प्रसार माध्यम भारत को ‘पिछडा’ कहने में तत्पर रहते हैं ; परंतु आज यूरोप की यह स्थिति होने पर ‘ऐसे शीर्षक कहां अंतर्धान हो गए हैं?’, यह प्रश्न उन्होंने उपस्थित किया ।

मुंबई के वर्सोवा चौपाटी पर सोने वालों का समर्थन

हडाला ने आगे कहा कि, क्या आपको स्मरण है, जब विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण मुंबई के वेसावे (वर्सोवा) तट पर अथवा उद्यानों में सोते हुए भारतीयों के चित्र संपूर्ण विश्व में प्रसारित किए गए थे ? उस पर परिहास किए गए तथा भारत का उपहास उड़ाया गया । आज यूरोप के अनेक भागों में लोग रात्रि के समय तटों पर एवं उद्यानों की घास पर सो रहे हैं ; क्योंकि उनके पास उपलब्ध यह सबसे सस्ता ‘एसी’ का विकल्प है ; परंतु इस समय विश्व उन पर हंस नहीं रहा, अपितु उनके प्रति सहानुभूति व्यक्त कर रहा है । वास्तव में प्रत्येक मनुष्य को सहानुभूति प्राप्त करने का अधिकार है ।

जलवायु में चरम परिवर्तन एक वैश्विक सत्य !

वीडियो के उत्तरार्ध में उन्होंने स्पष्ट किया कि, जलवायु में यह चरम परिवर्तन एक वैश्विक सत्य है । कोई भी देश इससे मुक्त नहीं हो सकता । तथापि किसी कारणवश केवल भारत से ही पूर्णता (परिशुद्धता) की अपेक्षा की जाती है । लगभग १४० करोड जनसंख्या वाले देश का प्रबंधन करना छोटे देशों के प्रबंधन से पूर्णतः भिन्न होता है । यदि हम २ व्यक्तियों के परिवार को चलाने की तुलना सैकड़ों व्यक्तियों के परिवार को चलाने से करें, तो वह सर्वथा त्रुटिपूर्ण होगा । इतनी विशाल चुनौतियां होने पर भी, भारत ने विगत दशक में अभूतपूर्व गति से विश्व के सबसे बडे मेट्रो नेटवर्क में से एक का निर्माण किया है, महामार्गों, विमानपत्तनों, डिजिटल भुगतान प्रणाली, वहनीय शीतलन विकल्पों तथा सार्वजनिक अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) का विस्तार किया है । भारत की आलोचना वहां अवश्य कीजिए जहां वह न्यायसंगत हो ; परंतु भारत की सफलताओं का उत्सव भी उतने ही आत्मविश्वास के साथ मनाइए ; क्योंकि यदि हम स्वयं अपने देश का गौरव नहीं करेंगे, तो कोई अन्य भी नहीं करेगा ।