रा.स्व. संघ के पंजीकरण के संदर्भ में कर्नाटक के गृह मंत्री के बयान पर परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत का वक्तव्य l

त्रिशूर (केरल) – संघ का कार्य अत्यंत खुले रूप से चलता है । संघ के पंजीकरण के बारे में बातें करना आदि सब राजनीति का भाग है तथा अब हमें ऐसी बातों की आदत हो गई है । संघ की स्थापना के केवल १० से १५ वर्षों के भीतर ही उसके पंजीकरण को लेकर मांगें एवं विवाद आरंभ हो गए थे । अपितु यदि ऐसे आरोप नहीं लगाए जाएं, तो हमें लगता है कि कुछ कमी रह गई है । संघ की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी । मूल हिन्दू धर्म का भी कहीं पंजीकरण नहीं हुआ है; विश्व में ऐसी अनेक चीजें हैं जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है । जिन्हें सरकार से धन या आर्थिक सहायता चाहिए होती है, उन्हें पंजीकरण की आवश्यकता पडती है । यह प्रतिक्रिया परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खडगे के बयान पर दी । खडगे ने कहा था कि कर्नाटक सरकार रा.स्व. संघ जैसी संस्थाओं के लिए आधिकारिक पंजीकरण को अनिवार्य बनाने हेतु कानूनी उपायों पर विचार कर रही है ।
परम पूजनीय सरसंघचालक द्वारा रखे गए मुख्य बिंदु
१. सरकार को संघ के अस्तित्व की पूरी जानकारी है !
सरकार को संघ के अस्तित्व की पूरी जानकारी है; इसलिए सरकार ने अब तक संघ पर दो बार प्रतिबंध लगाया था । पश्चात न्यायालय के आदेश तथा स्वयंसेवकों के सत्याग्रह के कारण यह प्रतिबंध हटा लिया गया । संघ पर प्रतिबंध लगाया गया, इसका अर्थ ही यह है कि सरकार उसके अस्तित्व से परिचित है । इसलिए ऐसी राजनीतिक बातें होती रहती हैं ।
२. लोगों को अच्छी तरह पता है कि हम कौन हैं एवं क्या कार्य करते हैं !
पिछले १०० वर्षों में किसी ने भी हमसे यह नहीं कहा कि हमें अपना पंजीकरण अवश्य कराना चाहिए । संघ का लिखित संविधान सरकार के पास उपलब्ध है, जिसे हमने वर्ष १९५० में ही प्रस्तुत कर दिया था । उस समय सरकार यह कह सकती थी कि, “पहले अपनी संस्था का पंजीकरण कराइए, उसके बाद ही हम इस संविधान को स्वीकार करेंगे”; परंतु उसने ऐसा नहीं कहा ।
फिर अब मैं इस विषय पर उत्तर क्यों दूं ? यह सब केवल राजनीति है एवं इस पत्र को गंभीरता से लेने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है । इसके माध्यम से लोगों के मन में संदेह उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है; लेकिन यह संभव नहीं है, क्योंकि लोगों को अच्छी तरह पता है कि हम कौन हैं ईवी हम क्या कार्य करते हैं ।
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