हत्या प्रकरण के ७२ वर्षीय दोषी को मिली अंतरिम जमानत ।
उत्तरप्रदेश सरकार को नोटिस दिया ।

नई दिल्ली – हत्या के एक प्रकरण के एक दोषी की अपील ४१ वर्षाें तक लंबित रहने से सर्वोच्च न्यायालय ने तीव्र अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए संबंधित व्यक्ति को अंतरिम जमानत दी, साथ ही इस विलंब के लिए उत्तरप्रदेश सरकार को नोटिस दिया ।
वर्ष १९८३ में विजय सिंह के भाई की हत्या हुई थी । इस प्रकरण में वर्ष १९८५ में कानपुर के एक सत्र न्यायालय ने विजय सिंह को दोषी ठहराकर आजन्म कारावास का दंड सुनाया था, उस समय उनकी आयु २८ वर्ष थी । उसके उपरांत विजय सिंह ने कनिष्ठ न्यायालय के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी । उनका अपील लंबित था, उस अवधि में उन्हें जमानत मिली । उसके उपरांत ४ दशकों तक वे जमानत पर बाहर थे ।
फरवरी २०२६ में अर्थात ४१ वर्ष उपरांत उच्च न्यायालय ने उनकी अपील निरस्त कर सत्र न्यायालय का निर्णय बनाए रखा । उच्च न्यायालय के इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी । वर्तमान समय में ७२ वर्ष के विजय सिंह बढती आयु के कारण विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं तथा जमानत की अवधि में उनका आचरण संतोषजनक होने की जानकारी न्यायालय को दी गई । इसका संज्ञान लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत पारित की, साथ ही इस संपूर्ण प्रकरण के कागदपत्र मंगाकर इसकी अगली सुनवाई होनेवाली है ।
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