
नई दिल्ली — गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने तथा पूरे देश में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग समय-समय पर विभिन्न संगठनों एवं सांसदों द्वारा की जाती रही है । नागरिक भी आवेदन एवं ज्ञापन प्रस्तुत कर ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग करते हैं ; किंतु वर्तमान में ऐसा कोई भी प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष विचाराधीन नहीं है, ऐसा केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया ।
१. मेघवाल ने कहा कि विभिन्न राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए गोहत्या संबंधी कानून अलग-अलग हैं । स्थानीय आवश्यकताओं एवं परिस्थितियों के अनुसार राज्य सरकारें निर्णय लेती हैं ।
२. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने राज्य के वर्ष १९५० के कानून के अंतर्गत पशु-वध संबंधी नियमों को अधिक कठोरता से लागू करने के लिए कदम उठाए हैं ।
गोहत्या-निषेध लागू करने के लिए केंद्र सरकार की इच्छाशक्ति आवश्यक !
विधिक दृष्टि से गोहत्या-निषेध कानून के समक्ष कुछ बाधाएं हैं । उदाहरणार्थ, ‘गायों की रक्षा का विषय केंद्र के अलावा राज्यों के अधिकार-क्षेत्र में आता है’ तथा ‘संविधान के अनुच्छेद ४८ के अनुसार गोसंरक्षण किया जाना चाहिए, किंतु यह नीति-निर्देशक तत्वों में सम्मिलित है, मौलिक अधिकार नहीं है’ आदि । तथापि यह ध्यान रखना चाहिए कि जो सरकार असंभव प्रतीत होने वाले अनुच्छेद ३७० को निरस्त कर सकती है, वह राष्ट्रव्यापी गोहत्या-निषेध भी लागू कर सकती है ।
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