यदि कोई राष्ट्र तथा समाज के लिए भयावह बन जाए , तो अहिंसा नहीं, हिंसा आवश्यक हो जाती है – Yogi Adityanath

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लक्ष्मणपुरी (उत्तरप्रदेश) – अहिंसा मानव जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए , किंतु जब कोई व्यक्ति राष्ट्र तथा समाज के लिए संकट बन जाता है , तब अहिंसा काम नहीं आती । ऐसी परिस्थिति में हिंसा आवश्यक हो जाती है , ऐसा वक्तव्य उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां एक कार्यक्रम में दिया। इस समय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित थे ।

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि केवल सुरक्षित वातावरण में ही विकास फल-फूल सकता है । देश की शक्ति ही विश्व में उसका स्थान निर्धारित करती है । जब हम सुरक्षा के मोर्चे पर सशक्त होंगे , तभी विश्व हमसे मित्रता करेगा । यदि आप दुर्बल होंगे , तो कोई भी आपके सामने नहीं झुकेगा । देश के शत्रुओं का सामना करते समय देश के सशस्त्र बलों की कार्यवाहियों में यह सिद्धांत दिखाई देता है । जिस प्रकार सशस्त्र बल प्रत्येक परिस्थिति में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं , उसी प्रकार देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का सम्मान करना एवं उनका आदर करना नागरिकों का भी दायित्व है ।

यदि परधर्म अपने स्वधर्म के साथ सहिष्णुता से व्यवहार नहीं करता , तो…

जिस प्रकार राष्ट्र के संदर्भ में योगी आदित्यनाथ ने वक्तव्य दिया , उसी प्रकार का वक्तव्य अनेक दशक पहले स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने धर्म के संदर्भ में दिया था । भारत राष्ट्र तथा हिन्दु धर्म के बीच अद्वैत होने के कारण उनका वक्तव्य आज भी पूर्णतः लागू होता है । उन्होंने कहा था , ‘परधर्म जिस समय हमारे स्वधर्म के साथ सहिष्णुता से व्यवहार करता है , उस समय परधर्म के साथ हम भी सहिष्णुता से व्यवहार करें , यह सद्गुण हो सकता है । तथापि जो परधर्म हमारे स्वधर्म के साथ सहिष्णुता से व्यवहार नहीं करता , ऐसे परधर्म पर परधर्म-सहिष्णुता की व्याख्या लागू नहीं होती ।’