गंगानदी में मांसाहारी अन्न का कचरा फेंकने से हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं – Allahabad High Court

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – गंगानदी में मांसाहारी अन्न का कचरा फेंकने से हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, ऐसी टिप्पणी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने की है । मार्च माह में गंगानदी में एक नौका पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करने के प्रकरण में १४ मुसलमान पुरुषों पर अपराध पंजीकृत किया गया था । उनमें से ५ लोगों को जमानत देते समय न्यायाधीश राजीव लोजन शुक्ला ने यह टिप्पणी की ।

१. न्यायालय ने कहा कि आरोपियों द्वारा व्यक्त की गई पश्चात्ताप की भावना छूट (जमानत) के लिए विचार में ली जा सकती है । इसमें केवल आरोपियों ने ही नहीं, अपितु उनके परिजनों ने भी हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होने के लिए खेद व्यक्त किया है ।

२. न्यायालय ने आगे जाकर यह भी निरीक्षण व्यक्त किया कि पहले आरोपियों पर लगाई गई आपराधिक धाराओं के लिए ७ वर्ष से अधिक के दंड का प्रावधान नहीं है, साथ ही नौका के मांझी द्वारा उसकी नौका को बलपूर्वक नियंत्रण में लेने के संदर्भ में दी गई शिकायत पर भी न्यायालय ने संदेह व्यक्त कर कहा कि प्रकरण पंजीकृत करने से पूर्व संबंधित मांझी ने उसको डराने धमकाने (रंगदारी वसूलने) के संदर्भ में अथवा उसकी असहमति (जोर-जबरदस्ती) के विषय में कोई भी शिकायत नहीं की थी । मांझी के द्वारा आरोप लगाए जाने में लगाया गया विलंब उसके द्वारा बताई जा रही कहानी पर संदेह उत्पन्न करता है ।

संपादकीय भूमिका

हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होने पर अनेक बार वे निष्क्रिय ही रहते हैं अथवा पुलिस अथवा प्रशासन को ज्ञापन प्रस्तुत कर पुनः सो जाते हैं दूसरी ओर मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत होने पर वे तुरंत ही ‘सर तन से जुदा’के (सिर काटने के) नारे लगाकर कानून को हाथ में लेने का प्रयास करते हैं । इसके कारण पुलिस एवं प्रशासन उनकी मांगें मानकर धार्मिक भावनाएं आहत करनेवालों पर तुरंत कार्यवाही करते हैं ।