सनातन धर्म का फिर से अपमान करने वाले उदयनिधि स्टालिन के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका ।

अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने याचिका प्रविष्ट की ।

तमिलनाडु के विपक्षी नेता उदयनिधि स्टालिन एवं अधिवक्ता अमिता सचदेवा

नई दिल्ली – तमिलनाडु के विपक्षी नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा हाल ही में सनातन धर्म को समाप्त करने संबंधी दिए गए वक्तव्य का संज्ञान लेने वाली एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में प्रविष्ट की गई है । अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने यह अवमानना याचिका प्रविष्ट करते हुए दावा किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी पुलिस ने स्टालिन के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की । इस प्रकरण पर १९ मई को सुनवाई होने वाली है ।

द्रमुक नेता उदयनिधि ने सितंबर २०२३ में ‘सनातन धर्म’ की तुलना ‘मलेरिया’ तथा ‘डेंगू’ जैसे रोगों से करते हुए उसके विनाश की ओर इंगित किया था । उन्होंने कहा था कि ‘सनातन धर्म जातिव्यवस्था एवं ऐतिहासिक भेदभाव पर आधारित है ।’ इस वक्तव्य को लेकर उनके विरुद्ध अनेक आपराधिक शिकायतें तथा कार्यवाही की मांग करने वाली याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में प्रविष्ट की गई थीं ।

बार-बार सनातन धर्म का अपमान करने वाले उदयनिधि स्टालिन ।

अधिवक्ता सचदेवा द्वारा अब दायर याचिका में कहा गया है कि उदयनिधि स्टालिन ने १२ मई को तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र में फिर से सनातन धर्म को समाप्त करने की बातें कहीं । उन्होंने कहा था, “लोगों में विभाजन पैदा करने वाला सनातन धर्म निश्चित रूप से समाप्त होना चाहिए ।” सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई लंबित होने तथा न्यायालय द्वारा पहले उनके वक्तव्यों पर अप्रसन्नता व्यक्त किए जाने के बाद भी उदयनिधि इस प्रकार की बातें लगातार करते रहे हैं । यह न्यायिक प्रक्रिया का अनादर जानबूझकर किया गया है ।