बडी संख्या में श्रद्धालु कर रहे हैं दर्शन !

भोजशाला – यहां की भोजशाला ‘कमाल मौला मस्जिद’ नहीं, अपितु हिन्दुओं का श्री वाग्देवी मंदिर है, ऐसा निर्णय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए जाने के अगले ही दिन बडी संख्या में हिन्दू दर्शन के लिए यहां पहुंचने लगे । उन्होंने यहां पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दिया । १६ मई की सुबह श्रद्धालु एवं भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर में पहुंचे । इसमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्री दुबे, केशव शर्मा तथा अशोक जैन सम्मिलित थे । सभी ने श्री वाग्देवी के स्थान तथा यज्ञकुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया । श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया । वर्तमान में पूरे धार शहर एवं भोजशाला परिसर की स्थिति पर पुलिस द्वारा कडी दृष्टि रखी जा रही है ।
🚩 BHOJSHALA AWAKENS!
Devotees have begun offering prayers at Bhojshala as large numbers of Hindus gather for Darshan with devotion and emotion. 🙏
🔱 Deity Ganesha’s image found on pillars
🕉️ “Om Namah Shivaya” inscriptions visible on the walls
🌸 Lotus flower patterns… https://t.co/FeaXt9ZnJO pic.twitter.com/YroSDTlYXX
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 16, 2026
भोजशाला मंदिर थी, है तथा रहेगी ! – श्रद्धालु
दर्शन के उपरांत श्रद्धालुओं ने कहा कि कई वर्षों पश्चात उन्हें बिना किसी बाधा के पूजा करने का अवसर मिला है ।
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का प्रत्येक कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है ।” मुस्लिम पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि उन्हें सर्वोच्च न्यायालय जाने की पूरी स्वतंत्रता है; परंतु भोजशाला मंदिर थी, मंदिर है तथा सदैव मंदिर ही रहेगी ।
भोजशाला के स्तंभों पर भगवान गणेश की आकृति तथा दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ दिखाई दिया !
आज तक समाचार चैनल के पत्रकार जब यहां पहुंचे, तो उन्हें भोजशाला परिसर के भीतर स्थित प्राचीन स्तंभों एवं दीवारों पर अनेक सनातन प्रतीक स्पष्ट रूप से दिखाई दिए । भोजशाला में कुल १०४ प्राचीन स्तंभ हैं, जिन पर विभिन्न धार्मिक आकृतियां उकेरी गई हैं । इनमें भगवान गणेश की आकृति, घंटियां, रिद्धि-सिद्धि की आकृतियां तथा अन्य पारंपरिक हिन्दू चिन्ह समाहित हैं । अनेक स्तंभों की नक्काशी मंदिर स्थापत्य शैली की प्रतीत हुई । भोजशाला की दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ तथा ‘ॐ सरस्वती नमः’ जैसे धार्मिक शब्द भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए ।
छत पर कमल के फूल की आकृति
छत पर कमल के फूल की आकृति भी है, जिसे हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक महत्त्व प्राप्त है । हिन्दू पक्ष का कहना है कि ये सभी प्रतीक इस बात के प्रमाण हैं कि भोजशाला मूलतः माता सरस्वती का मंदिर थी ।
चूना लगाकर चिन्हों को ढका गया था !
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट में इन प्रतीकों एवं आकृतियों का उल्लेख किया गया था । परिसर में रहे कई चिन्ह पहले चूने की परत से ढक दिए गए थे । बाद में सफाई तथा संरक्षण कार्य के समय ये आकृतियां एवं शिलालेख पुनः सामने आए । (सत्य को कितना भी छिपाने का प्रयास किया जाए, समय आने पर वह विश्व के सामने आ ही जाता है । इसी प्रकार हिन्दू धर्म को कितना भी अपकीर्त (बदनाम) करने या दबाने का प्रयास वैश्विक आर्थिक ‘डीप स्टेट’ द्वारा किया जाए, एक दिन उसका तेज पूरे विश्व को आलोकित करेगा । साथ ही, वही ‘डीप स्टेट’ के विनाश का कारण भी बनेगा । इसलिए हिन्दुओं को साधना बढानी चाहिए । – संपादक)
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