केवल भक्त ही मंदिरों का अच्छे ढंग से संचालन कर सकते हैं; इसलिए मंदिर भक्तों के नियंत्रण में आएं; इसके लिए सर्वाेपरि प्रयास करें !
पंचोपचार एवं षोडशोपचार पूजन का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

- देवता को अनामिका से चन्दन क्यों लगाएं ?
- किस देवता को कौन-से पुष्प चढाने चाहिए ?
- पुष्प चढाते समय डंठल देवता की ओर क्यों हो ?
- देवता को कपास के दो वस्त्र क्यों एवं कैसे चढाएं ?
देवालय में देवता के प्रत्यक्ष दर्शन से पूर्व के कृत्यों का अध्यात्मशास्त्र

- देवालय की रचना कैसी हो ?
- देवालय के कलश को नमस्कार क्यों करें ?
- पैर धोकर ही देवालय में प्रवेश क्यों करें ?
- देवालय का घंटा यथासंभव क्यों न बजाएं ?
संकलनकर्ता : सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवले,
सूक्ष्म ज्ञान-प्राप्तकर्ता : श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ एवं अन्य
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कोंकण क्षेत्र की देवराई भूमियों को ‘सरकार जमा’ करने की कार्यवाही की जांच कीजिए – राजस्वमंत्री ने उपसचिव को दिया निर्देश
शनिशिंगणापुर स्थित श्री शनिदेव की मूर्ति के संवर्धन हेतु वज्रलेपन किया जाएगा ।
(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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छोटे बच्चों को गोमांस देने का परामर्श का प्रकरण !