
मुंबई – नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में वर्ष २०२७ में आयोजित होनेवाले सिंहस्थ कुंभपर्व के बोधचिह्न का अनावरण सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार के हाथों से किया गया । कुंभपर्व के बोधचिह्न के लिए ‘कुंभमेला प्राधिकरण’ की ओर से प्रतियोगिता आयोजित की गई थी ।
इस प्रतियोगिता में अनुमानतः ३ सहस्र से अधिक प्रतिभागियों ने सहभाग लिया । इनमें से ३ उत्कृष्ट प्रतिभागियों का मुख्यमंत्री ने सत्कार किया गया । इसमें प्रथम स्थान प्राप्त करनेवाले पुणे के सुमित काटे को ३ लाख रुपए का धनादेश तथा सम्मानचिह्न, द्वितीय स्थान प्राप्त करनेवाले नोएडा के मयंक नायक को २ लाख रुपए का धनादेश एवं सम्मानचिह्न, तथा तृतीय स्थान प्राप्त करनेवाले पंढरपुर के पियुष पिंपळनेरकर को १ लाख रुपए का धनादेश तथा सम्मानचिह्न देकर सम्मानित किया गया । प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने प्रस्तावना के माध्यम से कुंभपर्व के आयोजन की जानकारी दी । इस अवसर पर विभिन्न अखाडों के साधु-संत उपस्थित थे । मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्रियों ने उपस्थित साधु-संतों का स्वागत किया ।
बोधचिह्न का महत्त्व !![]() कुंभपर्व का बोधचिह्न नाशिक एवं त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक परंपराओं पर आधारित है । इस बोधचिह्न में भगवान शंकर का त्रिशूल दर्शाया गया है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है । त्र्यंबकेश्वर मंदिर क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक दर्शानेवाली मंदिर की प्रतिकृति के रूप में दिखाया गया है । बोधचिह्न में काळाराम मंदिर की कमान भी प्रदर्शित की गई है । गोदावरी नदी को ‘शिवलिंग’ के रूप में दर्शाया गया है, जिसके माध्यम से कुंभपर्व में होनेवाले पवित्र अमृत (शाही) स्नान की परंपरा के महत्त्व को रेखांकित किया गया है । |

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