सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा शबरीमला मन्दिर की परम्पराओं का प्रकरण l
सरकार को कार्यवाही करने का अधिकार होने का न्यायालय का मत l

नई देहली – धार्मिक उपक्रमों के नाम पर मार्ग अवरुद्ध नहीं किए जा सकते । किसी भी धार्मिक समुदाय को अपनी उपासना पद्धति निश्चित करने का पूर्ण स्वतंत्रता होने एवं न्यायालय के उनके आन्तरिक धार्मिक विषयों में हस्तक्षेप न कर पाने के उपरान्त भी, यदि ऐसे धार्मिक उपक्रमों के कारण किसी भी ‘धर्मनिरपेक्ष’ उपक्रम में बाधा आ रही हो, तो उनके अधिकारों में हस्तक्षेप करने का अधिकार सरकार को है, ऐसा आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने अंकित किया । ९ न्यायमूर्तियों की पीठ के सनक्ष केरल के प्रसिद्ध शबरीमला मन्दिर की परम्पराओं संबंधी याचिकाओं पर वर्तमान में न्यायालय में एकत्रित सुनवाई चल रही है । उस पर न्यायालय ने उपर्युक्त मत प्रस्तुत किया ।
हिन्दुओं के पक्ष में भूमिका रखनेवाले याचिकाकर्ताओं का तर्क !
१. सुनवाई के नौवें दिन, ‘हिन्दू धर्म आचार्य सभा’ का प्रतिनिधित्व करनेवाले अधिवक्ता अक्षय नागरजन् ने न्यायालय के सामने तर्क दिया कि राज्यघटना के अनुच्छेद २५(२)(अ) के आधार पर सरकार किसी भी धार्मिक सम्प्रदाय के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती ।
२. राज्यघटना के अनुच्छेद २५(२)(अ) के अनुसार, धार्मिक प्रथाओं से सम्बन्धित किसी भी आर्थिक, वित्तीय, राजकीय जैसे अन्य धर्मनिरपेक्ष उपक्रमों का नियमन करने अथवा उस पर रोक लगाने का अधिकार राज्य (सरकार) को दिया गया है ।
३. अधिवक्ता नागरजन् ने ऐसा तर्क दिया कि अनुच्छेद २५ के अन्तर्गत दिया गया संरक्षण केवल धार्मिक श्रद्धा के विषयों तक सीमित नहीं है; अपितु उसमें उस श्रद्धा के बाह्य प्रकटीकरण का भी समावेश होता है, जिसमें किसी विशिष्ट देवता की उपासना से सम्बन्धित विधि, रीति-रिवाज, समारोह एवं प्रथाएं आदि सम्मिलित हैं ।
Roads cannot be blocked in the name of religious activities – Supreme Court of India while hearing matters related to Sabarimala Temple.
The Court said governments have the authority to act.
The principle should apply equally everywhere. Across many cities, roads are often… pic.twitter.com/Rmmjhbif5Q
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 29, 2026
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका !
इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने आदेश दिया कि यदि धार्मिक उपक्रमों का परिणाम किसी भी धर्मनिरपेक्ष उपक्रम पर हो रहा हो, तो उसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार राज्य (सरकार) को है । मान लीजिए कोई मन्दिर है एवं उनका कोई वार्षिक उत्सव है, उदाहरणार्थ वार्षिक रथयात्रा आयोजित करनी है, ऐसे समय मन्दिर के आसपास के सभी मार्ग आप अवरुद्ध नहीं कर सकते । इसका धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है ।
आपको अपनी धार्मिक विधि पूर्ण करने की पूर्ण स्वतंत्रता है; परन्तु सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध कर वैसा करने की आपको अनुमति नहीं है । नियमन के उद्देश्य से राज्य सरकार इसमें हस्तक्षेप कर सकती है ।
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