रेलवे में हिन्दुओं पर हलाल मांस की विवशता क्यों ? - डॉ. सचिन बोधनी, यात्री

नई देहली – कामाख्या-कोलकाता वन्दे भारत एक्सप्रेस एवं रेलवे के अन्य उपहारगृहों में हिन्दू यात्रियों को उनकी सम्मति के बिना हलाल मांस खिलाए जाने का प्रकरण सामने आया है । इसके विरुद्ध एक यात्री डॉ. सचिन बोधनी ने रेलमंत्री को पत्र लिखकर हिन्दुओं के लिए झटका मांस का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की थी । इस पर ‘भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन महामंडल (इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन – आई.आर.सी.टी.सी.) द्वारा दिया गया उत्तर अत्यंत अस्पष्ट है एवं उसमें हिन्दुओं की मांग की उपेक्षा की गई दिखाई दे रही है ।
❓ Why is Halal meat being imposed on Hindus in Railways? – Dr. Sachin Bodhani
Railway Administration Gives Evasive Reply to Demand for Jhatka Meat Instead of Halal for Hindu Passengers!
⚖️ Since Halal is linked to a specific religious process, forcing it on Hindu passengers… pic.twitter.com/WtGSpc3nMy
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 26, 2026
क्या था डॉ. बोधनी का पत्र ?
डॉ. बोधनी ने पत्र में स्पष्ट किया था कि हलाल पद्धति केवल एक विशिष्ट धर्म की है एवं उसे सार्वजनिक स्थानों पर थोपना, यह संविधान का उल्लंघन है, साथ ही हिन्दुओं के धार्मिक अधिकारों पर आघात है । ‘वन्दे भारत’ जैसी गाडियों में हिन्दू यात्रियों की संख्या बडी होने के कारण उन्हें झटका मांस का विकल्प मिलना, यह उनका अधिकार है ।
आई.आर.सी.टी.सी. का उत्तर एवं उसमें त्रुटियां !
डॉ. बोधनी के पत्र का उत्तर देते हुए आई.आर.सी.टी.सी. के समूह महाप्रबंधक ने कहा है कि, ‘हमारे द्वारा यात्रियों को जो अन्न परोसा जाता है, वह सरकार के ‘अन्न सुरक्षा कानून’ (‘एफ.एस.एस.ए.आई.’ के) नियमों के अनुसार होता है ।’ झटका अथवा हलाल मांस के प्रश्न पर सीधा उत्तर न देकर उन्होंने केवल ‘हम सरकारी नियमों का पालन करते हैं’, ऐसा तकनीकी उत्तर दिया है । रेलवे प्रशासन खाद्य सुरक्षा के विषय में बोल रहा है, फिर भी हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं एवं हलाल की विवशता के विषय में मौन धारण किए हुए है । केवल सरकारी नियमों का संदर्भ देकर हिन्दुओं की धार्मिक भावना के प्रश्न पर रेलवे प्रशासन समय निकाल रहा है, यह इस उत्तर से स्पष्ट हो रहा है ।
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