
नई दिल्ली – अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी किए जाने के बीच ईरान लगातार इसे हटाने के प्रयास कर रहा है । इसी क्रम में ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी नहीं हटाता, तो ईरान खाडी देशों के बीच होनेवाला व्यापार बंद कर देगा । इससे खाडी क्षेत्र में अन्य देशों के व्यापार पर बडा असर पड सकता है ।
अमेरिका द्वारा ईरान की आर्थिक नाकेबंदी
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की आर्थिक नाकेबंदी उसके विरुद्ध किए गए बम आक्रमणों जितनी ही घातक है । उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान की वे आर्थिक संस्थाएं, जो खाडी देशों के साथ व्यापार करती हैं, उन पर दूसरे चरण के आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं । इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान पर और कडे आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है ।
भारत को रूस से तेल खरीदने की अमेरिकी छूट समाप्त
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि रूस एवं ईरान से सीमित मात्रा में तेल खरीदने के लिए दी गई छूट का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा । अब यदि इन देशों से तेल खरीदा गया, तो अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड सकता है । इस छूट का बडा लाभ भारत को मिला था । हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के उपरांत भी भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति इसी छूट के कारण मिली थी ।
अमेरिकी ठिकानों को लक्ष्य बनाने के लिए ईरान को चीनी उपग्रह की सहायता
ईरान ने पिछले वर्ष खरीदे गए एक चीनी उपग्रह का उपयोग खाडी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की गतिविधियों पर दृष्टि रखने के लिए किया है । यह उपग्रह चीन की ‘अर्थ आई’ कंपनी द्वारा विकसित एवं प्रक्षेपित किया गया था, जिसे बाद में ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ की एयरोस्पेस फोर्स ने खरीदा । इस उपग्रह ने १३, १४ तथा १५ मार्च २०२६ को सऊदी अरब के ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ की तस्वीरें लीं । १४ मार्च को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वहां तैनात अमेरिकी विमानों को हानि पहुंचने की बात स्वीकार की थी । इसके अलावा, इस उपग्रह ने जॉर्डन के ‘मुवाफक साल्टी एयर बेस’, बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेडे के मुख्यालय, इराक के ‘एरबिल’ एयरपोर्ट, कुवैत के ‘कैंप ब्यूहरिंग’ और ‘अली अल सालेम एयर बेस’, जिबूती के ‘कैंप लेमोनियर’ तथा ओमान के ‘दुक्म’ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे स्थानों पर भी दृष्टि रखी थी । यह निगरानी केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं थी, अपितु संयुक्त अरब अमीरात के ‘खोर फक्कन’ कंटेनर पोर्ट, ‘किदफा’ ऊर्जा और जल शुद्धिकरण केंद्र, तथा बहरीन के बडे एल्युमिनियम संयंत्र ‘अल्बा’ प्लांट जैसी नागरिक सुविधाओं तक भी फैली हुई थी । यद्यपि, चीन के विदेश मंत्रालय ने ईरान को किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता देने के आरोपों को अस्वीकार किया है ।
चीन सरकार की अनुमति के बिना उपग्रह प्रक्षेपण असंभव
एक पूर्व पश्चिमी गुप्तचर अधिकारी के अनुसार, चीन में सरकारी अनुमति के बिना कोई भी संस्था उपग्रह प्रक्षेपण जैसा कदम नहीं उठा सकती । इससे संकेत मिलता है कि चीन सरकार अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की सहायता कर रही हो सकती है । ईरान द्वारा पडोसी देशों पर मिसाइल एवं ड्रोन आक्रमणों की पृष्ठभूमि में इस तरह के उपग्रह उपयोग से खाडी क्षेत्र में चिंता बढ गई है । चूंकि चीन इस क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक भागीदार एवं तेल का सबसे बडा खरीदार है, इसलिए यह स्थिति और अधिक संवेदनशील बन गई है ।
हमें हिन्दू धर्म के प्रति घृणा के विरोध में दृढतापूर्वक खडा होना चाहिए ! – US Congressman Sanford Bishop
Resolution Over Iran War : ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही रोकने वाला प्रस्ताव अमेरिका की संसद के उच्च सदन में पारित
Indus Water Treaty Crisis : सिंधु जल-वितरण करार को लेकर पाकिस्तान ने कश्मीर सीमा पर ३५ ड्रोन-रोधी यूनिट नियुक्त किए !
Obesity Among Children : यूरोपीय देशों की भांति भारत के बच्चों में बढ रहा है मोटापे का संकट ।
(और इनकी सुनिए…) ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन होने पर भारत की आलोचना करने से पीछे नहीं हटेंगे !’ – US Lawmakers
New FCRA Rules : ‘धार्मिक कृति’ के नाम पर धर्मांतरण करने वालों के विदेशी दान पर केंद्र सरकार का प्रहार