
वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया ! हिन्दू धर्म में यह एक पवित्र एवं महत्त्वपूर्ण त्योहार माना जाता है । इस वर्ष १९ अप्रैल को अक्षय तृतीया है ।
१. दान का महत्त्व

इस दिन दान का बडा महत्त्व होता है । इसलिए अनेक लोग वृद्धाश्रम में अथवा निर्धनों की बस्ती में जाकर जरूरतमंद लोगों को छाता, चप्पल, पानी की मटकी, टंकी, पंचा, वस्त्र आदि का दान देते हैं । अलसी, गेहूं, चने, दुग्धजन्य पदार्थ, जलकुंभ, सभी प्रकार के रस तथा गर्मी के मौसम में उपयुक्त वस्तुओं का दान देते हैं । इसके कारण अनंत फल की प्राप्ति होती है ।
२. इस दिन भगवान विष्णु एवं लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है । इस दिन विधिवत अनुष्ठान करने से मनोरथ पूर्ण होते हैं ।
३. इस अवधि में धूप बढती है; इसलिए अनेक व्यापारी अथवा संस्थाएं पेयजल का वितरण आरंभ करती हैं तथा पशुओं के लिए हौज बनाती हैं ।
४. नामजप
अक्षय तृतीया के समय में नामस्मरण का भी उतना ही महत्त्व है । इस दिन अपने इष्टदेवता का जितना संभव है, उतना नामस्मरण करें । अक्षय तृतीया के दिन किए गए नामस्मरण से घर के दोष दूर होते हैं तथा पुण्य अखंड टिका रहता है ।
५. संकल्प
अक्षय तृतीया के दिन हम संकल्प लेंगे । देवता के सामने एक अनाज का तथा दूसरा पानी से भरा कलश रखकर समृद्धि के लिए वरदान मांगेंगे तथा सुख, समृद्धि एवं स्वास्थ्यप्राप्ति के लिए भगवान विष्णु, अन्नपूर्णामाता एवं लक्ष्मीजी से प्रार्थना करेंगे ।
– श्री. दिलीप देशपांडे, जामनेर, जिला जळगांव, महाराष्ट्र.
कान्हादेश में मनाई जानेवाली अक्षय तृतीया !

कान्हादेश में अक्षय तृतीया हर्षाेल्लास के साथ मनाई जाती है । वहां इस त्योहार को ‘आखाजी’ कहते हैैं । इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में ताश खेली जाती है । इस दिन बेटियां जब मायके आती हैं, तब उनके लिए चने की पुरी, आम का रस, दाल; तो कुछ स्थानों पर चूल्हे पर भूनी जानेवाली चने की पूरियां बनाई जाती हैैं । अनेक गांवों में पेडों पर झूले बांधे जाते हैं तथा महिलाएं एकत्रित होकर आखाजी के गीत गाती हैं और बचपन की सहेलियों से मिलकर आनंद की वर्षा करती हैं ।
– श्री. दिलीप देशपांडे, जामनेर, जिला जळगांव, महाराष्ट्र.
अक्षय तृतीया एवं मित्रप्रेम !

अक्षय तृतीया के दिन ही सुदामा ने श्रीकृष्ण को मुट्ठीभर पोहा दिया था । तब भगवान श्रीकृष्ण ने भी सुदामा के मित्रप्रेम का प्रत्युत्तर देते हुए सुदामा को ज्ञात न हो, इस प्रकार से उन्हें अपार धनसंपत्ति प्रदान की । यह दिन इस मित्रप्रेम के लिए भी जाना जाता है ।
(संदर्भ : जालस्थल)
Raichur Public Muharram Banned : कर्नाटक के रायचूर जिले के २९ गांवों में मोहर्रम सार्वजनिक रूप से मनाने पर प्रतिबंध !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
Bangladesh Hindus : पिछले ४ महीनों में १०० हत्याएं, २८ बलात्कार एवं ९५ मंदिरों में तोडफोड
संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
मथुरा (उत्तर प्रदेश) में रामराज्य की स्थापना हेतु की गई सामूहिक प्रार्थना !