…अन्यथा ‘लाडकी बहीण’ (लाडली बहन) योजना बंद कीजिए !

मुंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र की सरकार को लगाई फटकार !

मुंबई – मुंबई महानगरपालिका से शिक्षा विभाग में नौकरी कर सेवानिवृत्त हो चुकी महिला ने उसे सांतवे वेतन आयोग के अनुसार पेंशनसहित अन्य लाभ न दिए जाने से मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की थी । इसकी सुनवाई करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने एप ‘लाडकी बहीण’ योजना पर ४० सहस्र करोड रुपए खर्च करते हैं, तो आपके पास पेंशन देने के लिए कैसे पैसे नहीं हैं ?, इसके साथ ही गैरशिक्षक कर्मचारियों को पेंशन, साथ ही अन्य लाभ देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो सरकार ‘लाडकी बहीण’ योजना बंद करे, इन कडे शब्दों में मुंबई उच्च न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई ।

इस याचिका पर चल रही सुनवाई के समय महानगरपालिका के अधिवक्ता ने बताया कि सांतवे वेतन आयोग के अनुसार पेंशन एवं अन्य लाभ देने के लिए महानगरपालिका के पास पैसे नहीं हैं; क्योंकि राज्य सरकार उसे पैसा नहीं देती ।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के समय चुनाव जीतने में महायुति को इस योजना से बडा लाभ मिला था । इस योजना के कारण सरकारी कोष पर प्रतिवर्ष ४३ सहस्र ७४० करोड रुपए का बोझ पड रहा है । उसके उपरांत सरकार द्वारा लाभान्वित महिलाओं की पडताल की प्रक्रिया चलाई, उसमें ७१ लाख महिलाएं अयोग्य सिद्ध हुई हैं ।