मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में धार भोजशाला प्रकरण की दैनिक सुनवाई आरंभ

इंदौर (मध्य प्रदेश) – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में धार भोजशाला प्रकरण की दैनिक सुनवाई आरंभ हो गई है । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह प्रकरण सुनवाई के लिए इंदौर खंडपीठ को भेजे जाने के उपरांत सभी पक्षों ने अपने – अपने पक्ष रखना आरंभ कर दिया है ।
हिन्दू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैनजी ने न्यायालय के समक्ष भोजशाला के हिन्दू कालखंड के इतिहास एवं परंपराओं से संबंधित तर्क प्रस्तुत किए । उन्होंने १०वीं और ११वीं शताब्दी का उल्लेख करते हुए संस्कृत के ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत किए, साथ ही राम मंदिर वर्डिक्ट २०१९ का भी संदर्भ दिया । उन्होंने कहा कि यह संपत्ति वक्फ बोर्ड की नहीं है तथा वर्ष २०२५ के वक्फ संबंधी नए आदेश का भी उल्लेख किया ।
प्रमुख बिंदु
१. हिन्दू पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए कहा कि प्राचीन काल से भोजशाला हिन्दुओं की आस्था का केंद्र रही है । सर्वेक्षण के निष्कर्षों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता बताई गई ।
२. सुनवाई के समय भोज राजवंश का भी उल्लेख किया गया । साथ ही इस्लामी आक्रमणों से हुई क्षति के उपरांत ब्रिटिश काल में हुए परिवर्तनों का संदर्भ दिया गया । भोजशाला के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्त्व को रेखांकित करते हुए विभिन्न प्रमाण प्रस्तुत किए गए । यह भी कहा गया कि यह क्षेत्र १०वीं – ११वीं शताब्दी से ‘संरक्षित धरोहर’ के रूप में जाना जाता रहा है ।
३. अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने वर्ष १९३५ के एक शिलालेख का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके पश्चात इस स्थल को लेकर विवाद उत्पन्न हुए तथा अवैध नियंत्रण का आरंभ हुआ । भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट, स्तंभों पर की गई नक्काशी एवं ऐतिहासिक अभिलेखों के आधार पर उन्होंने अपना पक्ष रखा ।
क्या है प्रकरण ?
धार स्थित भोजशाला में पहले सरस्वतीजी का मंदिर होने का दावा किया जाता है । कहा जाता है कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने उसे तोडकर वहां निर्माण किया । मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह ११वीं शताब्दी का कमाल मौला मस्जिद स्थल है । वर्तमान में यह परिसर भारतीय पुरातत्व विभाग के नियंत्रण में है । न्यायालय के आदेश पर यहां खुदाई एवं सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें विभिन्न मूर्तियां मिलने का दावा हिन्दू पक्ष द्वारा किया गया है ।
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