World War 3 : अप्रैल में तीसरे विश्व युद्ध के संकेत ! – ज्योतिषियों का ग्रह-स्थिति के आधार पर दावा

  • शनि एवं मंगल का आमना-सामना भीषण रक्तपात करा सकता है ।

  • परमाणु बम के उपयोग की संभावना जताई जा रही है ।

नई दिल्ली – ज्योतिष के अनुसार, अप्रैल में जब मंगल मीन राशि में गोचर कर रहा है, तब वह शनि पर क्रूर दृष्टि डाल रहा है, जिससे संघर्ष के योग बन रहे हैं । इसी प्रकार के ग्रहयोग वर्ष १९१७ (प्रथम विश्व युद्ध) एवं १९३९ (द्वितीय विश्व युद्ध) के समय बने थे । इसलिए वर्तमान ग्रहस्थिति के आधार पर कुछ ज्योतिषी तीसरे विश्व युद्ध की संभावना व्यक्त कर रहे हैं । शनि एवं मंगल का टकराव बडे रक्तपात का संकेत माना जा रहा है ।

दूसरी ओर, शनि एवं राहु की युति को विनाशकारी बताया जाता है, जो परमाणु हथियारों के उपयोग की ओर संकेत कर सकती है । साथ ही, सूर्य का मेष राशि में प्रवेश बडे देशों के बीच सत्ता संघर्ष को तीव्र कर सकता है । इस संबंध में ‘जी न्यूज’ की वेबसाइट पर रिपोर्ट प्रकाशित हुई है ।

१७, १८ एवं १९ अप्रैल को बडी घटना की आशंका

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इन दिनों ग्रह स्थिति अत्यंत संवेदनशील रहेगी । इस दौरान किसी बडी घटना के होने की संभावना जताई जा रही है ।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढने की आशंका – ज्योतिषाचार्य नीती शर्मा

शनि, राहु, मंगल तथा केतु जैसे अशुभ ग्रह साथ आने पर विनाशकारी घटनाएं हो सकती हैं । वर्तमान में शनि मीन राशि में है, जिसे हानि का संकेत माना जाता है । मंगल एवं राहु की युति विस्फोटक स्थिति बना सकती है । अग्नि तत्व (मंगल) तथा जल तत्व (मीन) के मिलन से तीव्र संघर्ष संभव है । हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव बढ सकता है ।

२० से २२ अप्रैल के समय स्थिति और गंभीर हो सकती है – ज्योतिषाचार्य एम.एम. ठाकूर

शनि, सूर्य एवं मंगल को स्फोटक ग्रह माना जाता है । शनि का मीन राशि में गोचर एवं मंगल की स्थिति समुद्री क्षेत्रों में गतिविधियां बढा सकती है । २ अप्रैल से तनाव बढने की संभावना है । २०-२२ अप्रैल के मध्य परिस्थिति अधिक गंभीर हो सकती हैं ।

परमाणु आक्रमण की आशंका गंभीर – पूर्व राजनयिक जे.के. त्रिपाठी

परमाणु आक्रमण की संभावना अत्यधिक गंभीर विषय है । सीमित आक्रमण भी बडे प्रभाव डाल सकते हैं । १९४५ के उपरांत परमाणु बम का प्रयोग नहीं हुआ है । वर्तमान संघर्ष और बढ सकता है तथा उसकी तीव्रता बढने की आशंका है ।

नेतन्याहू को अमेरिका का समर्थन कितना मिलेगा, अनिश्चित – विदेश नीति विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेवा

समुद्री एवं तटीय क्षेत्रों में संघर्ष अधिक देखने को मिल सकता है । अमेरिका कुछ सीमा तक पीछे हट सकता है । इजराइल अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए संघर्ष जारी रख सकता है । नेतन्याहू को आगे अमेरिका का कितना समर्थन मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं है ।