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ओटावा (कनाडा) – कनाडा की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कोमन्स ने ‘सी-9’ (कॉम्बैटिंग हेट एक्ट) नामक एक महत्त्वपूर्ण एवं अत्यधिक प्रभाववाला विधेयक पारित किया है । इस विधेयक को आगे की अनुमति के लिए संसद के उच्च सदन सीनेट ऑफ कनाडा के पास भेजा गया है । कनाडा में लंबे समय से व्यक्त की जा रही चिंताओं, विशेषकर खालिस्तानी आतंकवादी विचारधारा के सार्वजनिक महिमामंडन पर रोक लगाने की दिशा में इसे एक बडा कदम माना जा रहा है ।
आतंकवादी संगठनों के प्रतीकों पर प्रतिबंध
इस विधेयक का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रावधान यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर आतंकवादी संगठनों से जुडे प्रतीकों का उपयोग कर किसी पहचान योग्य समूह के विरुद्ध जानबूझकर द्वेष फैलाना अपराध माना जाएगा । इसका सीधा प्रभाव बब्बर खालसा इंटरनैशनल तथा इंटरनैशनल सिक्ख यूथ फेडरेशन जैसे खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों पर पडेगा । कनाडा के कानून के अनुसार इन संगठनों को पहले ही आतंकवादी घोषित किया जा चुका है । इनके झंडे फहराना या प्रचार सामग्री बांटना अब कानूनी कार्रवाई की सीमा में आएगा । वर्ष १९८५ में हुए एयर इंडिया फ्लाइट १८२ बॉम्बींग (कनिष्क विमान विस्फोट) जैसे बडे आतंकी आक्रमण से इन संगठनों का संबंध रहा है, जिसमें ३२९ लोगों की मृत्यु हुई थी ।
🇨🇦 Canada Signals Tough Stand on Khalistani Extremism 🚨
"Combating Hate Act" bill passed in the lower house proposes action against Khalistani terror outfits, with a likely ban on flags & symbols.
Groups like Babbar Khalsa & ISYF could face stricter enforcement.
A shift in… pic.twitter.com/UmSkJRGtXW
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 27, 2026
धार्मिक एवं शैक्षिक संस्थानों की सुरक्षा की पर जोर
नए कानून में किसी भी समुदाय के विद्यालय, धार्मिक स्थल या सांस्कृतिक केंद्रों तक लोगों की आवाजाही रोकना, उन्हें धमकाना या बाधाएं उत्पन्न करना भी अलग अपराध माना जाएगा । कनाडा में गुरुद्वारों, हिन्दू मंदिरों एवं अन्य सामुदायिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन, तोडफोड एवं धमकी की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह निर्णय लिया गया है । ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा बनाने की मांग इंडो-कनाडाई समुदाय लंबे समय से कर रहा था । यह विधेयक उस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है ।
इंडो-कनाडाई समुदाय की प्रतिक्रिया
इंडो-कनाडाई समुदाय ने इस विधेयक को बहुत संतोषजनक एवं महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा है । उनके अनुसार, इससे कई वर्षों से चल रही धमकियों एवं तोडफोड की घटनाओं पर रोक लग सकती है । यद्यपि उनकी एक महत्त्वपूर्ण मांग अभी भी लंबित है—भारतीय दूतावास एवं राजनयिक कार्यालयों को आंतरिक विशेष सुरक्षा दी जाए, क्योंकि पहले वहां भी प्रदर्शन एवं आक्रमणों की घटनाएं हो चुकी हैं ।
संपादकीय भूमिकाकनाडा में सत्ता परिवर्तन के उपरांत वहां की नई सरकार को भारत का महत्त्व समझ में आने लगा है, यह इसका संकेत माना जा रहा है ! |

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