‘सनातन प्रभात’ के समाचार की विधानसभा में गूंज !

मुंबई, २३ मार्च (वार्ता.) – प्रतिवेदन समय पर प्रस्तुत करने के विषय में विधानमंडल के नियम हैं; तथापि विधानमंडल में प्रस्तुत किए जाने वाले १०० प्रतिवेदन प्रलंबित हैं । अतः अध्यक्ष वार्षिक प्रतिवेदन समय पर प्रस्तुत करने के विषय में संबंधित प्राधिकरणों को आदेश दें, ऐसा आवाहन भाजपा के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने २३ मार्च को विधानसभा में किया ।
‘महाराष्ट्र स्थावर संपदा नियामक प्राधिकरण’ के वर्ष २०१७ से २०२५ की कालावधि के ८ वार्षिक प्रतिवेदन २३ मार्च को सदन में सम्मिलित रूप से प्रस्तुत किए गए । इस पर सुधीर मुनगंटीवार ने आपत्ति जताई । ‘वर्ष २०१७ से अब तक के प्रतिवेदन इतने वर्षों पश्चात प्रस्तुत किए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र की हत्या है । लोकतंत्र की हत्या रोकने के लिए आदेश दें । यदि इतने वर्षों के प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं, तो क्या उस कालावधि का वेतन नहीं दिया गया, तो चलेगा ?’ ऐसा प्रश्न सुधीर मुनगंटीवार ने उपस्थित किया ।
प्रतिवेदन विलंब से प्रस्तुत होना अनुचित ! – राहुल नार्वेकर, अध्यक्ष, विधानसभा

सुधीर मुनगंटीवार द्वारा उपस्थित किया गया सूत्र अत्यंत उचित है । वर्ष २०१७ से अब तक के प्रतिवेदन इतने वर्षों पश्चात आना अनुचित है । कभी-कभी विलंब के कारण भी उचित होते हैं । यदि विलंब के कारणों में तथ्य प्रतीत नहीं हुआ, तो यह विषय सदन में लिया जाएगा ।
‘सनातन प्रभात’ ने उजागर किया प्रकरण !राज्य की १२५ सरकारी संस्थाओं ने साधारणतः ३ से १४ वर्षों तक वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए हैं, यह समाचार दैनिक ‘सनातन प्रभात’ में २६ फरवरी को प्रकाशित हुआ था । उसका संज्ञान लेकर विधायक मुनगंटीवार ने विधानसभा में यह सूत्र रखा । |
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