Namaz On Roads : इस्लामी देशों में भी सडकों पर नमाज पढने की अनुमति नहीं है ! – सुनील आंबेकर, रा.स्व. संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर

चेन्नई – इस्लामी देशों में भी सडकों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती । वहां नमाज के लिए विशेष स्थान निर्धारित होते हैं । जब कोई सरकार सडकों पर नमाज पर प्रतिबंध लगाती है, तो उसे ‘धार्मिक प्रतिबंध’ के रूप में न देखकर कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के निर्णय के रूप में देखा जाना चाहिए, ऐसा वक्तव्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने ‘द हिन्दू’ समाचारपत्र को दिए एक साक्षात्कार में किया । भाजपा-शासित राज्यों में सडकों पर नमाज या गंगा में इफ्तार पार्टी पर होनेवाली कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने यह टिप्पणी की ।

१. चारधाम मंदिरों में ‘सनातनी’ शपथपत्र के बारे में उन्होंने कहा कि किसी भी प्रार्थना स्थल की व्यवस्था उस धर्म में आस्था रखनेवाले लोगों के लिए होती है । लोकतंत्र में यदि किसी को यह व्यवस्था अनुचित लगती है, तो वह आवाज उठा सकता है तथा इसके लिए माध्यम उपलब्ध हैं ।

२. पश्चिम एशिया के युद्ध पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह समय विपक्षी दलों के लिए सरकार का साथ देने एवं राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का है । युद्ध सत्य एवं लोककल्याण के लिए लडा जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए । भारत इसी सही मार्ग पर चल रहा है ।

३. जनसंख्या में परिवर्तन के विषय पर उन्होंने इतिहास का संदर्भ देते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह समझ में आता है कि उनकी उपासना पद्धति परिवर्तित हो गई हो, फिर भी उनके पूर्वज एवं इतिहास एक ही हैं; परंतु एक वर्ग ऐसा मानता है कि परंपरा परिवर्तित होने के कारण यह देश अब उनका नहीं रहा । इसी मानसिकता के कारण भारत का विभाजन हुआ ।

४. उन्होंने ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ (सीएए) एवं ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (एनआरसी) प्रक्रिया का समर्थन किया । यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और राष्ट्रहित की रक्षा के लिए है । अवैध घुसपैठियों पर कानूनी कार्रवाई होगी तथा यदि कोई गलती से बाहर रह गया हो, तो सुधार के लिए व्यवस्था उपलब्ध है ।

५. ‘पडोसी देशों (नेपाल, बांग्लादेश) के युवा सडकों पर उतरते हैं, तो भारत के युवा ऐसा क्यों नहीं करते?’, इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि भारत के युवा अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं । उन्हें विश्वास है कि सरकार उनके हित में काम कर रही है । वे संविधान का सम्मान करते हैं तथा देश के विकास में योगदान देते हैं ।

६. वर्ष २०२५ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १०० वर्ष पूरे किए हैं । इस बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग ८८ सहस्र शाखाएं लगती हैं, जिनमें लाखों लोग भाग लेते हैं । संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता, विकास एवं सुरक्षा के सिद्धांतों पर १०० वर्ष पहले संगठन की स्थापना हुई थी ।