
भुवनेश्वर (ओडिशा) – कालाहांडी जिले के बिरिमुहान नामक एक दूरस्थ वनवासी गांव के पहले धर्मांतरित १३६ लोगों ने कुछ दिन पूर्व ही अपने पूर्वजों के सनातन हिन्दू धर्म में पुनः प्रवेश किया । ‘धर्म जागरण समन्वय विभाग, ओडिशा’ के नेतृत्व में आयोजित समारोह में पारंपरिक विधियों, मंत्रोच्चार तथा पादप्रक्षालन के माध्यम से उनका हिन्दू धर्म में स्वागत किया गया ।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ‘घरवापसी’ आंदोलन के अखिल भारतीय प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जुदेव उपस्थित थे । इस अवसर पर उन्होंने कहा, “आज हम स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वतीजी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं । उन्होंने ओडिशा के आदिवासी बहुल फुलबाणी (कंधमाल) जिले में सनातन आस्था से दूर हुए वनवासी समुदायों को पुनः हिन्दू धर्म से जोडने के लिए अथक प्रयास किए; परंतु अगस्त २००८ में ‘धर्मांतरण माफियाओं’ ने षड्यंत्र रचकर उनकी हत्या कर दी । हम उनके आदर्शों एवं कार्यों को सदैव जीवित रखेंगे ।”

कालाहांडी क्षेत्र लंबे समय से धर्मांतरण का एक प्रमुख केंद्र रहा है । राष्ट्रविरोधी शक्तियों ने स्थानीय आदिवासी समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक पिछडेपन का लाभ उठाकर लंबे समय से धर्मांतरण का कार्य किया है । इस पृष्ठभूमि में ‘घरवापसी’ का यह कार्यक्रम पूरे क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है ।
इस अवसर पर पूजनीय स्वामी जनकानंद गिरि, संन्यासी कुंजदेव मनीशी, धर्म जागरण के क्षेत्रीय प्रमुख वीनय कुमार भुइया, ओडिशा राज्य के प्रमुख वीर वीक्रम आचार्य, संतोषकुमार पांडा, प्रकाशचंद्र ठाकुर, आर्य समाज के कपील देव शास्त्री, सनातनी योद्धा विवेक अग्रवाल, समीर कुलकर्णी, सतीश मिश्रा आदि गणमान्य उपस्थित थे ।
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