सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया) पर आक्रोश की लहर !

बेंगलुरु (कर्नाटक) – राज्य में गोतस्करी के विरुद्ध कठोर विधि (कानून) प्रभावी है, तथापि ‘रक्षक ही भक्षक बन गए हैं’, ऐसा संदेह गोतस्करी से संबंधित प्रसारित हुए एक चलचित्र (वीडियो) के कारण उत्पन्न हुआ है । इस चलचित्र में पुलिस धन लेकर गायों का अवैध परिवहन करने वाले ट्रक को मुक्त करते हुए दिखाई दे रही है । सामाजिक माध्यमों पर इस विषय में अत्यंत रोष व्याप्त है । (पुलिस को विधि एवं व्यवस्था बनाए रखने का प्रशिक्षण देते समय नैतिकता की शिक्षा नहीं दी गई, यह उसी का परिणाम है ! – संपादक)
इस चलचित्र में दृष्टिगोचर हो रहा है कि, गायों का अवैध परिवहन करने वाला ट्रक पुलिस ने निरीक्षण हेतु रोका था । निरीक्षण कर विधि सम्मत कार्रवाई करने के स्थान पर पुलिस ने ट्रक में उपस्थित गोतस्करों से धन लेकर ट्रक को आगे जाने दिया । जनसाधारण की दृष्टि बचाकर पुलिस द्वारा रिश्वत ग्रहण करने का यह दृश्य भ्रमणभाष ( मोबाइल) में सुरक्षित हो गया । सामाजिक माध्यमों पर यह प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है कि, ‘केवल रिश्वत दें, फिर आप कुछ भी ले जा सकते हैं’ ऐसी पुलिस की कार्यशैली हो गई है । वरिष्ठ अधिकारियों से यह मांग की गई है कि वे तत्काल हस्तक्षेप कर भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें ।
संपादकीय भूमिकासरकार को ऐसे पुलिसकर्मियों को तत्काल पदच्युत (नौकरी से निकाल) कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए ! |
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