आम आदमी दल के नेता राघव चड्ढा ने दूरसंचार कंपनियों से पूछा प्रश्न

नई दिल्ली – देश में ‘मोबाइल रिचार्ज’ के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया है । संसद में विपक्ष के नेता राघव चड्ढा ने यह प्रश्न दूरसंचार कंपनियों एवं सरकार से पूछा । उन्होंने पूछा कि यदि वर्षभर के लिए महीने का ‘मोबाइल रिचार्ज’ करना हो, तो १२ के स्थान पर १३ बार रिचार्ज क्यों करना पडता है ? कंपनियों ने २८ दिनों की रिचार्ज व्यवस्था रखी है, इसलिए ऐसा होता है तथा यह व्यवस्था सामान्य नागरिकों के लिए छिपी हुई लूट जैसी है ।
📱 13 Mobile Recharges in 12 Months? 🤔
In Rajya Sabha, AAP MP Raghav Chadha questioned telecom companies and the government over the 28-day mobile recharge cycle, calling it a hidden burden on consumers.
Key Points ⬇️
▪️ Most prepaid plans are 28 days, not a true monthly… pic.twitter.com/D5PAtoVDRr
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 12, 2026
उन्होंने आगे कहा कि यदि २८ दिनों के अनुसार गणना की जाए, तो २८ × १३ = ३६४ दिन होते हैं । इसका अर्थ है कि पूरे वर्ष सेवा चालू रखने के लिए एक अतिरिक्त रिचार्ज करना पडता है । यदि योजना वास्तव में मासिक स्वरूप की है, तो उसकी वैधता ३० या ३१ दिनों की होनी चाहिए । रिचार्ज योजनाएं अधिक पारदर्शी एवं ग्राहक हितकारी बनाई जानी चाहिए ।
चड्ढा ने आम नागरिकों की एक अन्य समस्या भी सामने रखी । उन्होंने कहा कि यदि किसी उपयोगकर्ता का रिचार्ज समाप्त हो जाए, तो बाहर जानेवाली कॉल (आउटगोइंग कॉल) बंद होना समझ में आता है; परंतु कई बार कंपनियां आनेवाली कॉल (इनकमिंग कॉल) भी बंद कर देती हैं । उनके अनुसार यह सामान्य नागरिकों के लिए बडी समस्या बन जाती है; क्योंकि अब मोबाइल नंबर बैंकिंग, ओटीपी (वन-टाइम-पासवर्ड), सरकारी सेवाओं और नौकरी से जुडे संपर्क के लिए आवश्यक हो गया है ।
दूरसंचार कंपनियों की भूमिका !
दूरसंचार कंपनियं २८ दिनों की योजनाएं इसलिए उपयोग करती हैं; क्योंकि वे ठीक ४ सप्ताह की अवधि से मेल खाती हैं । इससे उनकी बिलिंग व्यवस्था एवं योजनाओं का प्रबंधन करना आसान हो जाता है । भारत के दूरसंचार क्षेत्र का नियमन Telecom Regulatory Authority of India करता है । नियमों के अनुसार कंपनियों को कम से कम ३० दिन या उससे अधिक वैधतावाली एक योजना देना आवश्यक है; परंतु २८ दिनों की योजनाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं है । (इसका अर्थ यह कहने की सुविधा है कि प्राधिकरण एवं कंपनियों के बीच साठगांठ है । इस विषय पर सरकार को संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से उत्तर मांगना चाहिए तथा उन पर क्या कार्रवाई की जाएगी, यह जनता को बताना चाहिए ! – संपादक)
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