NPF Opposes Vande Mataram : ‘वन्दे मातरम्’ का गायन अनिवार्य करने का ‘नागालैंड पीपल्स फ्रंट’ का विरोध

ईसाई बहुल राज्य के लिए ‘थोपा गया निर्णय’ होने का आरोप ।

कोहिमा (नागालैंड) – शैक्षणिक संस्थानों तथा विधानसभा में ‘वन्दे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किए जाने के निर्णय का ‘नागालैंड पीपल्स फ्रंट’ (एन.पी.एफ.) पार्टी ने तीव्र विरोध किया है । पार्टी का कहना है कि यह निर्णय ईसाई बहुल नागालैंड के लिए ‘पराया’ एवं ‘प्रतिकूल’ है, साथ ही यह भी कहा गया कि यह ‘थोपा गया निर्णय’ है तथा इससे राज्य की धार्मिक तथा सांस्कृतिक पहचान के लिए 6 भी संकट है । नागालैंड में एन.पी.एफ. भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी है ।

पार्टी के अनुसार इस राष्ट्रगीत में हिन्दू देवताओं का उल्लेख है । नागरिकों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध किसी कार्य में भाग लेने के लिए बाध्य करना, भारत की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की भावना के विपरीत है । (ऐसे लोगों से तो यह कहने का समय आ गया है कि वे अपने धार्मिक ढांचे के अनुसार चलने वाले देश में ही चले जाएं – संपादक)

केंद्र सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग भी पार्टी ने की है ।

संपादकीय भूमिका 

स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि, “हिन्दुओं का धर्मांतरण हुआ, तो वह राष्ट्रांतरण होता है ।” यही बात यह देश निरंतर देख रहा है । अब ऐसे भटके हुए लोगों को सही मार्ग पर लाने के लिए कठोर होने की आवश्यकता है ।