Stray Dogs : महाराष्ट्र में ६ वर्षों में ३० लाख से अधिक नागरिकों को कुत्तों ने काटा !

  • महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों का आतंक !

  • वर्ष भर में मुंबई में १ लाख २८ सहस्र नागरिकों को कुत्तों ने काटा

  • प्रतिदिन औसतन १ सहस्र ३६९ लोगों को कुत्ते काटते हैं

प्रशासन केवल उपाययोजनाओं का आश्वासन न दे, अपितु आवारा तथा आक्रामक कुत्तों के नियंत्रण हेतु ठोस कार्य-योजना कार्यान्वित करे, जिससे नागरिक सुरक्षित वातावरण में जीवन यापन कर सकें !
श्री. सचिन कौलकर, प्रतिनिधि, मुंबई

मुंबई, १ मार्च (वार्ता.) – राज्य के मुंबई, नागपुर, पुणे एवं ठाणे जैसे प्रमुख नगरों में आवारा कुत्तों की समस्या अत्यंत गंभीर हो गई है, जिससे सामान्य नागरिक भयभीत होकर में जीने को विवश हैं । विगत ६ वर्षों में राज्य में ३० लाख से अधिक नागरिकों को कुत्तों ने काटा है । केवल वर्ष २०२४ में मुंबई में ही १ लाख २८ सहस्र नागरिकों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया । राज्य में प्रतिदिन औसतन १ सहस्र ३६९ नागरिकों के कुत्ता-दंश का शिकार होने से सार्वजनिक सुरक्षा का प्रश्न गंभीर हो गया है । २८ फरवरी को विधान परिषद में नगर विकास विभाग ने तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी प्रदान की है ।

राज्य में, विशेषकर मुंबई तथा नागपुर नगरों में आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं में हुई वृद्धि के विषय पर विधान परिषद में सदस्य कृपाल तुमाने, डॉ.(श्रीमती) मनीषा कायंदे, हेमंत पाटील, योगेश टिळेकर, प्रवीण दरेकर, प्रसाद लाड, अधिवक्ता निरंजन डावखरे, डॉ. परिणय फुके, विक्रांत पाटील, सदाशिव खोत आदि ने प्रश्न उपस्थित किए थे । जनवरी से नवंबर २०२५ की कालावधि में पुणे में २७ सहस्र ४६६ लोगों को कुत्तों ने काटा था । दिवा (जिला ठाणे) की ६ वर्षीय कु. निशा शिंदे की आवारा कुत्ते के काटने के उपरांत रेबीज संक्रमण के कारण दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई थी ।

प्रशासन द्वारा उपाययोजना !

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नगर विकास विभाग ने सूचित किया है कि, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार नगरों के विद्यालयों, चिकित्सालयों, क्रीड़ा परिसरों तथा रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों के निकट आवारा कुत्तों के लिए आश्रय स्थल (शेल्टर) बनाने का कार्य आरंभ किया गया है । इसके लिए ३ स्थानों को निश्चित किया गया है एवं अन्य १७ स्थानों की खोज की जा रही है । कुत्तों की संख्या सीमित रखने हेतु नसबंदी अभियान को गति प्रदान की जा रही है । रेबीज प्रतिरोधी टीकों का अभाव न हो, इसके लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है ।