धार्मिक स्थलों के विकास हेतु ३ सहस्र ६६१ करोड रुपये की निधि को मान्यता !

राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा महाराष्ट्र शासन की प्रशंसा

राज्यपाल आचार्य देवव्रत

मुंबई, २३ फरवरी (वार्ता.) – अष्टविनायक गणपति मंदिर, श्रीक्षेत्र तुलजाभवानी देवी मंदिर, श्रीक्षेत्र ज्योतिबा मंदिर, चौंडी (अहिल्यानगर) स्थित पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर का स्मारक, श्रीक्षेत्र त्र्यंबकेश्वर (नाशिक), श्री करवीरनिवासिनी श्री महालक्ष्मी अंबाबाई देवस्थान परिसर एवं श्रीक्षेत्र भीमाशंकर; इन धार्मिक स्थलों के विकास की रूपरेखा हेतु मेरे शासन ने ३ सहस्र ३६१ कोटि रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है । इन शब्दों में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बजट सत्र से पूर्व विधानमंडल के अपने अभिभाषण में शासन के कार्यों का गौरवगान किया ।

राज्यपाल के अभिभाषण के महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. वर्ष २०२७-२८ में नाशिक में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभपर्व के नियोजन एवं सुव्यवस्थापन हेतु ‘कुंभमेला प्राधिकरण’ की स्थापना की गई है । इस प्राधिकरण द्वारा यात्रियों हेतु परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, जलापूर्ति एवं सुरक्षा का नियोजन किया जाएगा ।

२. दुर्ग (किले) पर्यटन को प्रोत्साहन देने हेतु राज्य के ७८ स्थानों पर आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त ‘नमो पर्यटन’ सूचना एवं सुविधा केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है ।

३. मराठी भाषा को अभिजात (शास्त्रीय) भाषा का स्तर प्राप्त होने के पश्चात विद्यार्थियों में तकनीकी शिक्षा के प्रति रुचि उत्पन्न हो; इस हेतु ‘महाराष्ट्र राज्य तकनीकी शिक्षा मंडल’ द्वारा डिप्लोमा पाठ्यक्रम के १५४ विषयों का संपूर्ण साहित्य मराठी में अनुदित किया गया है ।

४. ‘महाराष्ट्र उद्योग निवेश एवं सेवा नीति २०२५’ के माध्यम से राज्य में ७० लाख ५० सहस्र करोड रुपये का निवेश हुआ है, जिससे ५० लाख रोजगारों का सृजन हुआ है ।

५. ‘विकसित महाराष्ट्र’ नीति के अनुसार वर्ष २०४७ तक महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को ५ ट्रिलियन डॉलर (५ लाख करोड रुपये) करने का लक्ष्य शासन ने निर्धारित किया है । इस हेतु ‘विजन मैनेजमेंट यूनिट’ की स्थापना की गई है ।