मंदिरों से प्राप्त होनेवाला राजस्व जनकल्याण के लिए उपयोग किया जाए ! – RSS Chief Mohan Bhagwat

  • देश के मंदिरों का नियंत्रण सरकार के पास नहीं, अपितु भक्तों के पास होना चाहिए !

  • प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत की स्पष्टोक्ती

प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) – मंदिरों से मिलनेवाला राजस्व जनकल्याण के लिए उपयोग किया जाए एवं उसका नियंत्रण सरकार के स्थान पर उत्तरदायी भक्तों के पास होना चाहिए । देश के प्रमुख मंदिरों का व्यवस्थापन एवं उनके राजस्व का जनकल्याण के लिए होनेवाला उपयोग पारदर्शक पद्धति से हो , साथ ही निष्पक्ष अथवा प्रामाणिक संस्था की देखरेख में यह प्रक्रिया हो । प्रश्न यह है कि , मंदिरों की देखभाल कौन करेगा ? वहां नियमित पूजा-अर्चा हो , इसकी चिंता कौन करेगा ? सिख समाज गुरुद्वारों का संचालन अतिशय उत्तम करता है । देश के धर्माचार्यों को इस पर मंथन करना चाहिए एवं समाज को उत्तरदायित्व लेना चाहिए । इस दिशा में संघ तैयारी कर रहा है एवं शीघ्र ही परिणाम दिखेंगे , ऐसी जानकारी प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवतजी ने यहां संघ के १०० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में दी ।

प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवतजी द्वारा प्रस्तुत सूत्र :

१. सरकार संघ चलाता है , यह भ्रम !

रा.स्व. संघ सरकार चलाता है , यह भ्रम है । हमारे पास ऐसा कोई भी रिमोट कंट्रोल नहीं है । सरकार चलाना अत्यंत कठिन कार्य है । इसलिए हम अपना कार्य करते हैं ; मात्र सुझाव दे सकते हैं । सरकार का विरोध करनेवाले हमारी भी आलोचना करते हैं ; परंतु सत्ता में स्थित अनेक लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं ।

२.संघ की सबसे बडी समस्या हिन्दू समाज ही है ; क्योंकि उसे जागृत करने के लिए बडे स्तर पर प्रयत्न करने पड रहे हैं । हिन्दू समाज में शक्ति है ; पर वह विभाजित है एवं स्वार्थ में अटका है । यदि समाज एकजुट हुआ, तो देश को आगे ले जा सकता है ।

३.संघ में कोई भी व्यक्तिगत लाभ नहीं मिलता !

संघ की कार्यपद्धति सुदृढ है ; क्योंकि संघ देश की उन्नति के लिए कार्यकर्ताओं से केवल समर्पण की अपेक्षा रखता है ; उसके बदले में कुछ नहीं देता । संघ में अवसरवादी लोग आए , तो भी वे संघ में अधिक समय तक टिकते नहीं ; क्योंकि उन्हें शीघ्र ही समझ आता है कि , यहां उन्हें कोई भी व्यक्तिगत लाभ नहीं मिलेगा ।

४.नई बातों को विरोध नहीं है ; पर पश्चिमीकरण की नकल करना उचित नहीं है । आधुनिक बनें ; पर अपनी जडें एवं संस्कृति न भूलें ।

५. संयुक्त परिवार अब अल्प हुए हैं ; पर संबंधों की भावना टिकी रहनी चाहिए । सप्ताह में न्यूनतम (कम से कम) एक बार तो परिवार को एक साथ बैठना चाहिए । बच्चों को संस्कार घर एवं विद्यालय दोनों से मिलते हैं ।

६. सामाजिक माध्यम एक तकनीक है । उसके स्वामी बनें , दास (गुलाम) नहीं । स्क्रीन टाइम (उपयोग करने की कालावधि) निश्चित करें एवं बच्चों को उचित दिशा दें ।

७. राजनीति समाज से बनती है । यदि समाज में सद्भाव एवं समझदारी होगी , तो नेता भी वैसे ही होंगे । समाज जाग्रुत रहने पर परिस्थिति सुधरेगी ।

अमेरिका के आयात शुल्क का भारत पर कोई भी परिणाम नहीं होगा !

अमेरिका की पुरानी पद्धति है । वह शस्त्र एवं आर्थिक शक्ति के बल पर भारत को झुकाना चाहती है ; पर भारत इतना सशक्त है कि , वह उसके आगे झुका नहीं है । हमारी जनता तैयार है । इसलिए अमेरिका के आयात शुल्क का भारत पर कोई भी परिणाम नहीं होगा ।