प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत का कथन
(घरवापसी अर्थात हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश)

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) – भारत में रहने वाले मुसलमान भी हिन्दू ही हैं, वे किसी अरब देशों से नहीं आए हैं । उनकी भी ‘घरवापसी’ (हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश) करनी है; परंतु यह कार्य धीरे-धीरे होगा, ऐसा वक्तव्य प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत ने यहां किया ।
प.पू. सरसंघचालक द्वारा प्रतिपादित सूत्र
१. एक परिवार में न्यूनतम ३ बच्चे होने चाहिए । अब जो भी युवक-युवती विवाह कर रहे हैं, उन्हें बताएं कि वे न्यूनतम तीन बच्चों को जन्म दें ।
२. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मार्गदर्शक सिद्धांत किसी के भी विरुद्ध नहीं हैं , विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मार्गदर्शक सिद्धांत किसी के भी विरुद्ध नहीं हैं । सबको साथ लेकर चलना होगा । इस संदर्भ में एक पक्ष को लगता है कि यह हमारे विरुद्ध है । दूसरे पक्ष को लगता है कि यह हमारे पक्ष में है । सरकार नियम बनाती है । यदि किसी को वे उचित न लगें, तो उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहिए । यह प्रकरण वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में प्रलंबित है । सरकार जो भी विधि (कानून) बनाएगी, उसका पालन करना चाहिए ।
Statement by Parampujya Sarsanghchalak Dr. Mohanji Bhagwat
Indian Muslims are originally Hindus, and therefore they should be brought back through ‘Ghar Wapsi’.
घर वापसी l #RSS100Years
PC: @news24tvchannel pic.twitter.com/t3pH696mlA— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 18, 2026
३. यदि कोई व्यक्ति गर्त (गड्ढे) में गिर गया हो, तो उसे बाहर आने के लिए हाथ देना होगा तथा बाहर खडे व्यक्ति को उसे बाहर निकालने के लिए थोडा झुककर हाथ आगे बढाना होगा, जब दोनों हाथ आगे बढ़ाएंगे तभी कार्य सिद्ध होगा ।
४. हमें जाति के प्रपंच में नहीं पडना है । यह जाति ऐसी वस्तु है, जिसे हम अनेक दशकों से समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं; परंतु यह जाति कहीं जाती ही नहीं ।
५. मुसलमान भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुडना चाहते हैं । उनके ही लोगों ने ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ नामक मंच बनाया है ।
मुगल एवं अंग्रेज हिन्दू धर्म एवं संस्कृति को मिटा नहीं सके
५०० वर्ष मुगल तथा २०० वर्ष अंग्रेजों ने देश पर राज्य किया तथा वे चले गए; परंतु हिन्दू धर्म एवं संस्कृति इतनी सुदृढ है कि वे उसे मिटा नहीं सके । इतने वर्षों में हिन्दू धर्म का कोई कुछ भी अहित नहीं कर सका, तो अब कौन क्या बिगाड पाएगा ?
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