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वशेणी (उरण) – यहां समुद्र तट पर रेत बंदरगाह के पास श्राद्धविधि के लिए स्थापित की गई शिवपिंडी को ११ फरवरी की रात तोड दिया गया । ग्रामीणों को संदेह है कि यह तोडफोड धर्मांधों द्वारा की गई है । “गांव का कोई व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता,” ऐसा ग्रामीणों का दृढ मत है । कुछ दिन पहले इसी पिंडी पर मानव मल लगाकर उसकी विडंबना किए जाने की घटना सामने आई थी । उस समय गांव के एक हिन्दुत्वनिष्ठ युवक ने उस पिंडी को साफ किया था ।
🛕 Attack on Faith in Raigad – Silence from Authorities
In Vasheni (Raigad district), a sacred Shivpindi was desecrated just days before #Mahashivratri
Villagers suspect fanatic elements are behind this shameful act.
There are serious allegations that instead of swiftly… pic.twitter.com/LLK6hYILmm
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 14, 2026
इस घटना के तीन दिन पश्चात महाशिवरात्रि होने के कारण दो पुलिसकर्मी यहां सुरक्षा के लिए आए थे । “यह तोडफोड किसने की ?” इसका पता लगाकर उसे दंडित करने की अपेक्षा इस घटना को दबाने की प्रवृत्ति पुलिस के वक्तव्य से ग्रामीणों को समझ में आई, जिससे ग्रामीणों द्वारा रोष व्यक्त किया जा रहा है ।
पुलिस यह कहकर कि गांव की एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला ने यह कृत्य किया होगा, मानो आरोपियों का बचाव कर रही है । वास्तव में वह महिला गांव के एक मंदिर में रहती है, वहां सफाई करती है और भगवान को फूल भी चढाती है । इसलिए “वह ऐसा कृत्य नहीं कर सकती,” ऐसा ग्रामीणों ने कहा ।
(किसी की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं, अपितु हिन्दुओं में जागृति लाने के उद्देश्य से यह छायाचित्र प्रकाशित किया गया है ।)
पुलिस से पूछताछ करने पर टालमटोल एवं प्रकरण दबाने का प्रयास !जब ‘सनातन प्रभात’ के संवाददाता ने पुलिस से पूछताछ की, तो उन्होंने कहा, “गांव में एक पागल महिला है, उसी ने यह कृत्य किया होगा । इसमें समाचार बनाने जैसा कुछ नहीं है ।” (कल यदि हिन्दुओं पर आक्रमण हो जाए तो भी पुलिस ऐसा ही कहेगी, यह हिन्दुओं को इस घटना से समझ लेना चाहिए एवं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेना चाहिए ! – संपादक) गांव के सामाजिक कार्यकर्ता श्री अविनाश पाटील ने वह शिवपिंडी एवं चबूतरा बनवाया है । इसलिए ‘सनातन प्रभात’ के संवाददाता ने इस घटना की जानकारी लेने के लिए श्री अविनाश पाटील से संपर्क किया । तब उनकी पत्नी श्रीमती पाटील ने कहा, “पुलिस ने उन्हें कहा कि ‘इस बात का अधिक प्रचार न करें ।’ इसलिए गांव के लोगों में पुलिस के प्रति अत्यधिक रोष उत्पन्न हुआ है ।” |
संपादकीय भूमिका
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