Global Hindu Organizations : बांग्लादेश में हिन्दुओं का सुनियोजित नरसंहार रोको ! – वैश्विक हिन्दू संगठनों की अपील


वॉशिंगटन (अमेरिका) – बांग्लादेश में हिन्दुओं पर जारी हिंसा की पृष्ठभूमि में वैश्विक हिन्दू संगठनों के नेताओं ने एक अपील जारी की है । इस पत्र में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्ववाली अंतरिम सरकार के समय बांग्लादेश में हिन्दुओं को बढती हिंसा एवं उत्पीडन का सामना करने पर चिंता व्यक्त की गई है । साथ ही ‘बांग्लादेश में हिन्दुओं के सुनियोजित नरसंहार को रोका जाए’ की मांग की गई है ।

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‘हिन्दूज एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ के समन्वय से तैयार इस पत्र को १५ देशों की १२५ से अधिक संस्थाओं एवं व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त है । इस पत्र में संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया है ।

‘हिन्दूज एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ के समन्वय से तैयार प्रसिद्धी पत्रक :

पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि इस समस्या की लगातार अनदेखी की गई तो स्थानीय धार्मिक अल्पसंख्यकों के अस्तित्व पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है ।

१. यूनुस के नेतृत्ववाले अंतरिम प्रशासन के समय हिन्दू अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढी है ।

२. अगस्त २०२४ में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक परिवर्तन के उपरांत हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा, धमकियां तथा बलपूर्वक विस्थापन की घटनाएं बढी हैं ।

३. बांग्लादेश के आगामी चुनावों के संदर्भ में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ रहे हैं ।

४. पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष १९५१ में तत्कालीन पूर्व पाकिस्तान की जनसंख्या में हिन्दुओं का प्रतिशत लगभग २२ प्रतिशत था, जो अब घटकर ७ प्रतिशत से भी कम रह गया है ।

५. मानवाधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट लगातार जारी जातीय एवं धार्मिक उत्पीडन का संकेत मानी जा रही है ।

६. इस पहल के अंतर्गत बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध ठोस कदम उठाने की मांग की गई है, जिसमें स्वतंत्र तथ्य-जांच अभियान, सार्वजनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बाध्यता एवं उत्तरदायित्व निश्चित करनेवाली व्यवस्थाएं सम्मिलित हैं ।

संपादकीय भूमिका 

पिछले ५५ वर्षों से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर लगातार आक्रमण हो रहे हैं । भारत में यदि अल्पसंख्यकों के विरोध में छोटी-सी घटना भी हो जाए तो देशव्यापी हिंसा भडक उठती है, परंतु बांग्लादेश में हिन्दुओं की रक्षा के लिए वैश्विक संगठन केवल अनुरोध ही करते हैं । ऐसे में यदि कोई यह प्रश्न करे कि ‘हिन्दुओं का नरसंहार क्यों नहीं रुकता ?’, तो इसमें आश्चर्य क्या है ?