Pakistan Sikhs Harassment : पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सिखों पर अन्याय-अत्याचार निरंतर जारी !

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – पाकिस्तान का संविधान लिखित स्वरूप में धार्मिक अल्पसंख्यकों को समानता एवं संरक्षण का अभिवचन देता है, किन्तु प्रत्यक्ष चित्र नितांत भिन्न है । इस संबंध में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सिखों पर होने वाले अन्याय-अत्याचारों का एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) उजागर हुआ है । वर्ष २०२३ में पेशावर एवं समीपस्थ के क्षेत्रों में दुकानदार दयाल सिंह एवं मनमोहन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । ईशनिंदा के आरोप अथवा भीड हिंसा कर संपत्तियों पर अवैध स्वामित्व ले लेने के प्रकरण भी हो रहे हैं, ऐसा इस प्रतिवेदन में उल्लेख है ।

‘खालसा वॉक्स’ में प्रकाशित इस प्रतिवेदन के अनुसार अल्पसंख्यकों के लिए निश्चित सुधार उनके ऊपर होने वाले अत्याचारों की स्वतंत्र जांच, न्यायालयीन आदेशों की तत्काल कार्रवाई, पक्षपाती अधिकारियों के दायित्व निश्चित करने एवं ईशनिंदा कानून अथवा भीड हिंसा के दुरुपयोग से संरक्षण देने से ही संभव हैं ।

सिख व्यापारियों पर अन्याय !

१. प्रतिवेदन में पेशावर के सिख व्यवसायी गुरविंदर सिंह ने वर्ष २०२२ में ३ मुस्लिम सहभागी के साथ व्यवसाय प्रारंभ किया । इसके अंतर्गत भ्रमण भाष का प्रदर्शन एवं विक्री केंद्र प्रारंभ किया गया । प्रत्यक्ष में तीनों मुस्लिमों ने सिंह की साढे सात करोड की पाकिस्तानी रुपये की ठगी की ।

२. अपहार (लूट) उजागर होने पर सिंह ने पेशावर पुलिस में आरोप प्रविष्ट किया । सत्र न्यायालय एवं पेशावर उच्च न्यायालय सहित अनेक न्यायालयों ने सिंह के पक्ष में न्यायदान किया , तथापि आरोपी स्वतंत्र घूम रहे हैं । उन्होंने अभी तक राशि वापस नहीं की ।

३. सिंह ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफ्रिदी, प्रांतीय एवं केंद्र सरकार, तथा पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष असीम मुनीर के पास भी न्याय मांगा; किन्तु कहीं से भी हस्तक्षेप नहीं हुआ ।

सिख महिलाओं का लगातार अपहरण हो रहा है !

प्रतिवेदन में सिख महिलाओं का अपहरण, बलपूर्वक इस्लाम कबूल करवाना एवं विवाह के लिए बाध्य करने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है । वर्ष २०१९ में ननकाना साहिब में जगजीत कौर का शस्त्र के जोर पर अपहरण किया गया, बलपूर्वक धर्मांतरण कराया गया एवं एक मुस्लिम व्यक्ति से विवाह करवा दिया गया । न्यायालय ने भी अपहरणकर्ता के पक्ष में न्यायदान किया दिया ।

संपादकीय भूमिका 

सिखों के हित के लिए लडने का अभिकथन करने वाले कनाडा, ब्रिटेन आदि देशों के खलिस्तानवादी, अब पाक में सिखों की दुर्दशा पर एक शब्द भी नहीं बोलेंगे । इसका कारण है, उनका बनावटी सिख धर्म प्रेम ! खलिस्तानवादी आंदोलन पाकिस्तान प्रायोजित है एवं केवल भारत को विभाजित करने के लिए है, यह ध्यान रखें !