‘व्यक्ति के निधन के समय उसके पास उसके मृत संबंधी क्यों आते हैं ?’, इस विषय में श्री. राम होनप को सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान !

‘व्यक्ति के निधन के समय उसके पास उसके मृत संबंधी सूक्ष्म विश्व से आते हैं । मृत संबंधियों को यह कैसे ज्ञात होता है कि उनके संबंधी का निधन होनेवाला है ? ऐसे व्यक्ति के पास उसके मृत संबंधी क्यों आते हैं ?’, इस विषय में गुरुकृपा से सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान आगे दिया है ।

१. मृत संबंधियों की विशेषताएं

अ. मृत संबंधी यदि अतृप्त हों, तो वे उनके परिजनों के घर में अथवा उस परिसर में स्थित वृक्ष पर रहते हैं । ऐसे मृत संबंधी उनके परिजनों का संपूर्ण जीवन पर दृष्टि रखते हैं ।

आ. मृत संबंधी सूक्ष्म एवं वायुरूप में होते हैं ।

इ. उन्हें परिजनों के शरीर में स्थित सभी स्थूल एवं सूक्ष्म घटक दिखाई देते रहते हैं ।

२. मृत संबंधियों को ‘उनके परिवार के व्यक्ति का निधन कब होनेवाला है ?’, यह समझ में आने की प्रक्रिया

श्री. राम होनप

व्यक्ति के निधन का समय निकट आते ही ‘पहले उसके शरीर के सभी सूक्ष्म प्रवाहों का विलुप्त होना, उसके उपरांत उसके शरीर की सभी कोशिकाओं एवं अंगों का कार्य समाप्त होना तथा अंत में उसके प्राण अस्थिर होना’, मृत संबंधियों को उसके ये लक्षण सूक्ष्म से दिखाई देते हैं । तब उन्हें यह समझ में आता है कि अब उस व्यक्ति का निधन होनेवाला है ।

३. व्यक्ति के निधन के समय उसके पास सूक्ष्म से उसके मृत संबंधियों के आने के विविध कारण

३ अ. मिलने की इच्छा होना : जिसका निधन होनेवाला है, उस व्यक्ति से कुछ मृत संबंधियों के दीर्घकालीन संबंध होते हैं अथवा उस व्यक्ति के प्रति प्रेम होता है । इसलिए ऐसे मृत संबंधियों में संबंधित व्यक्ति के निधन के उपरांत उस लिंगदेह से मिलने की इच्छा होती है ।

३ आ. संघर्ष आरंभ करना : व्यक्ति के कुछ परिजनों के साथ विवाद अथवा झगडे अधूरे होते हैं । मृत व्यक्ति उन्हें पूर्ण करने के लिए अपने संबंधी के निधन की प्रतीक्षा करते रहते हैं । उस व्यक्ति का निधन होने पर सूक्ष्म लोक में ऐसी लिंगदेह तथा उसके मृत संबंधियों के मध्य का संघर्ष नए सिरे से आरंभ होता है ।

सारांश : साधना न करनेवाले व्यक्ति का निधन होने के पश्चात सूक्ष्म लोक में उसके जटिल संघर्षमय जीवन का आरंभ होता है । ‘इस दुष्चक्र से मुक्ति मिले’, इसके लिए प्रतिदिन साधना करना महत्त्वपूर्ण है ।’

– श्री. राम पद्माकर होनप (सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान), सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

(१.१०.२०२५)

सूक्ष्म : इन पंचज्ञानेंद्रियों में मन एवं बुद्धि से परे जो कुछ भी है, वह ‘सूक्ष्म’ है । साधना में प्रगति किए हुए कुछ व्यक्तियों को ये ‘सूक्ष्म’ संवेदनाएं अनुभव होती हैं । विविध धर्मग्रंथों में इस ‘सूक्ष्म’ ज्ञान का उल्लेख मिलता है ।