India EU Deal : भारत-यूरोपीयन युनियन के मध्य हुआ ‘मुक्त व्यापार समझौता’ !

  • वैश्विक ‘जीडीपी’ का २५ प्रतिशत !

  • ​वैश्विक व्यापार के एक तिहाई भाग का प्रतिनिधित्व !

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन

​नई देहली – भारत तथा यूरोपीयन युनियन के मध्य २७ जनवरी के दिन ‘मुक्त व्यापार समझौता’ किया गया । यूरोपीय युनियन के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते की घोषणा की । ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जाने वाला यह समझौता भारत के लिए ऐतिहासिक बताया जा रहा है । प्रधानमंत्री मोदी ने भाष्य किया कि, ‘भारत तथा यूरोपीय संघ के मध्य यह समझौता ‘समस्त समझौतों की जननी’ है’ ।

विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मध्य समन्वय का अद्भुत उदाहरण ! – प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, भारत-यूरोपीयन युनियन व्यापार समझौते से भारत में उत्पादन बढ़ेगा तथा देश में सेवा एवं संबंधित क्षेत्रों के व्यापक विस्तार में सहायता प्राप्त होगी । इस मुक्त व्यापार समझौते से वैश्विक व्यवसाय तथा निवेशकों का भारत पर विश्वास और भी दृढ होगा । यह व्यापार समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को और अधिक सुदृढ़ता प्रदान करेगा । भारत के विविध क्षेत्र, वस्त्र उद्योग, रत्न, आभूषण आदि उद्योगों को इस व्यापार समझौते का लाभ प्राप्त होगा । इस समझौते से समस्त भारतीयों तथा यूरोपीय देशों के लाखों लोगों के लिए वृहत अवसर उपलब्ध होंगे । विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मध्य समन्वय का यह एक अद्भुत उदाहरण सिद्ध हुआ है । यह समझौता वैश्विक ‘जीडीपी’ के अनुमानित २५ प्रतिशत तथा वैश्विक व्यापार के लगभग एक तिहाई भाग का प्रतिनिधित्व करता है ।

​यूरोपीयन युनियन स्वयं के विरुद्ध युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है ! – अमेरिका के वित्तमंत्री की समझौते पर आलोचना

‘यूरोपीयन युनियन स्वयं के विरुद्ध युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है’, ऐसा आरोप अमेरिका के वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत तथा यूरोपीयन युनियन के मध्य हुए मुक्त व्यापार समझौते पर लगाया । बेसेंट ने कहा कि, पिछले सप्ताह क्या हुआ ? इस पर विचार करें । हमने भारत पर कर लगाया और आज यूरोप उनके साथ व्यापार समझौता कर रहा है । रूस अपना कच्चा तेल भारत भेजता है । भारत में तेल का शोधन किया जाता है और पश्चात यूरोप को बेचा जाता है । तकनीकी रूप से यूरोप वह शोधित उत्पाद क्रय कर रहा है, जो वास्तव में रूस का तेल है । बेसेंट ने अंत में कहा कि वे (यूरोपीय देश) स्वयं के विरुद्ध युद्ध के लिए निधि उपलब्ध करवा रहे हैं ।

संपादकीय भूमिका

भारत पर स्वेच्छा से समझौता थोपना । भारत पर कीचड़ उछालकर उसे एकाकी करने के प्रयास करना तथा वे समस्त प्रयास विफल होने पर उससे गठबंधन करने वाले यूरोपीय संघ की आलोचना करना । क्या अमेरिका की यही उपयोगिता शेष है, ऐसा ही इस घटनाक्रम से प्रतीत होता है !