Bangal Saraswati Puja : बंगाल में ४ स्थानों पर वसंत पंचमी के दिन श्री सरस्वती देवी की पूजा का तृणमूल कांग्रेस द्वारा विरोध


कोलकाता (बंगाल) – ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस शासित बंगाल में वार्षिक हिन्दू पर्व सरस्वती पूजा के समय कई स्थानों पर बाधाएं उत्पन्न की गईं । २३ जनवरी को सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक गुटबाजी के कारण उत्तर २४ परगना जिले के कमरहाटी शहर में श्री सरस्वती देवी की पूजा में अडचनें डाली गईं ।

मंदिर पर ताला !

‘डीडी न्यूज बांग्ला’ की रिपोर्ट के अनुसार, बेलघरिया सर्वजनिन श्री श्री दुर्गा चौक सोसायटी के मंदिर पर तृणमूल कांग्रेस के एक गुट ने ताला लगा दिया । इसके कारण स्थानीय हिन्दू महिलाएं श्री सरस्वती देवी की पूजा नहीं कर सकीं । इस विवाद पर अब तक तृणमूल कांग्रेस के नगरसेवक कोई समाधान नहीं निकाल पाए हैं । स्थानीय पुलिस ने यह कहकर हस्तक्षेप करना अस्वीकार कर दिया कि “जब तक दोनों गुटों में सहमति नहीं बनती, ताला नहीं खोला जाएगा ।”

एक महिला ने कहा कि मंदिर सभी के लिए साझा पूजा स्थल होना चाहिए तथा ताले की दो चाबियां होनी चाहिए—एक उनके पास तथा एक हमारे पास । दूसरी महिला ने कहा कि यह मंदिर किसी की निजी संपत्ति नहीं, अपितु सभी का है ।

ममता बनर्जी के कॉलेज में मुस्लिम नेता द्वारा श्री सरस्वती देवी की पूजा का विरोध !

दक्षिण कोलकाता के सरकारी अनुदानित जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि श्री सरस्वती देवी की पूजा आयोजित करने के कारण तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने उसे धमकी दी । पीडिता के अनुसार उस नेता का नाम दाऊद आलम मोल्ला है ।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में छात्रा ने बताया कि दाऊद आलम मोल्ला बाहर खडा था तथा उसने उसकी विधि (लॉ) की डिग्री की पढाई को हानि पहुंचाने की धमकी दी । यह वही कॉलेज है जहां बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने शिक्षा प्राप्त की थी । इससे पहले जनवरी २०२५ में भी श्री सरस्वती देवी की पूजा करने पर छात्राओं को बलात्कार एवं हत्या की धमकियां मिलने के समाचार प्रकाशित हुए थे ।

गुटबाजी के कारण पूजा मंडप बंद !

२३ जनवरी को कूचबिहार जिले के दिनहाटा कॉलेज में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच झडप हो गई, जिसके कारण श्री सरस्वती देवी का पूजा मंडप छोड या तोड़ दिया गया । कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाना पडा । सूचना मिलते ही दिनहाटा थाने के प्रभारी एवं उप-विभागीय पुलिस अधिकारी कॉलेज परिसर में पहुंचे ।
पूजा के लिए आए हिन्दू श्रद्धालुओं को अपनी जान एवं संपत्ति की सुरक्षा के लिए वहां से भागना पडा । घटनास्थल के दृश्य यह दर्शाते हैं कि तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कॉलेज को रणक्षेत्र में परिवर्तित कर दिया था ।

मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण विद्यालय में पूजा की अनुमति नहीं !

उत्तर २४ परगना जिले के बारासात शहर में हिन्दू छात्रों को विद्यालय परिसर में श्री सरस्वती देवी की पूजा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई । रिपोर्ट के अनुसार, विद्यालय में ५० प्रतिशत से अधिक छात्र मुस्लिम होने के कारण यह अनुमति अस्वीकार की गई ।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पुलिसकर्मी छात्रों को श्री सरस्वती देवी की पूजा करने से रोकते हुए दिखाई देते हैं । इसके उपरांत हिन्दू छात्रों को विद्यालय के बाहर फुटपाथ पर पूजा करनी पडी । प्रदीप चटर्जी नामक व्यक्ति ने कहा कि विद्यालय में हिन्दू अल्पसंख्यक होने के कारण यहां पूजा नहीं हो सकती । बंगाल एवं बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति में अब कोई अंतर नहीं रह गया है । पुलिस ने श्री सरस्वती देवी की मूर्ति को विद्यालय के दरवाजे के बाहर रख दिया ।

भाजपा द्वारा तीव्र विरोध !

इन घटनाओं का भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कडा विरोध किया । उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रश्न उठाया कि “क्या बंगाल अब बांग्लादेश बनता जा रहा है ?” उन्होंने कहा कि यदि हिन्दू अल्पसंख्यक हो जाएं, तो उनके साथ किस प्रकार व्यवहार किया जाता है, यह इन घटनाओं से स्पष्ट होता है ।

संपादकीय भूमिका 

इससे एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि ‘बंगाल दूसरा बांग्लादेश बनता जा रहा है’ !