
विश्वविख्यात सोमनाथ मंदिर पर मुगलों द्वारा किए आक्रमण को १ सहस्र वर्ष पूरे हो चुके हैं । इस उपलक्ष्य में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन किया गया । इस उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार उपयुक्त एवं समर्पक थे । सोमनाथ मंदिर नष्ट करने के अनेक प्रयास किए गए; परंतु कोई उसे नष्ट नहीं कर पाया, उस मंदिर का तथा श्री सोमनाथ भगवान का कुछ ऐसा ही अद्भुत सामर्थ्य है’, उनके संबोधन का सार यही था । देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने अथक प्रयास किए कि यह मंदिर न बन पाए; जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री ने इस मंदिर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की । वर्ष १०२६ में सोमनाथ मंदिर पर पहला जिहादी आक्रमण हुआ । तब से लेकर आज तक अर्थात १ सहस्र वर्ष तक इस मंदिर का अस्तित्व में रहना सचमुच बुद्धि-अगम्य है । इससे सनातन धर्म की अविनाशिता सिद्ध होती है । ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र’ में भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है । इसमें आरंभ में ही ‘सौराष्ट्रे सोमनाथं च…’, ऐसा उल्लेख है । इसका अर्थ कुल १२ ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले श्री सोमनाथ का उल्लेख किया जाता है । जिस मंदिर में ऐसा शिवलिंग हो, भला ऐसे महापापी लोग उस मंदिर का चैतन्य कैसे सहन कर पाएंगे ? इसके चलते ही इस मंदिर पर आक्रमण कर उसे नष्ट करने के अनेक प्रयास किए गए । गजनी, औरंगजेब आदि आक्रांताओं ने जितनी बार इस मंदिर पर आक्रमण किए, उतनी बार यह मंदिर उसी गौरव से खडा रहा, अपनेआप में यह सचमुच ही एक चमत्कार है । वहां साक्षात भगवान शिव का वास है, इसकी इससे बडी प्रतीति और क्या हो सकती है ?
३१ अक्टूबर १९४७ को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री न.वि. गाडगीळ एवं गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर की भग्न स्थिति का अवलोकन कर मंदिर के जीर्णाेद्धार की घोषणा की । किंतु तत्कालीन हिन्दूद्वेषी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यथासंभव इसका विरोध किया; परंतु तब भी यह मंदिर उसी गौरव से पुनः खडा हुआ । पाकिस्तान के तत्कालीन विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी ने वर्ष २०२१ में जहर उगलते हुए कहा, ‘मैं मोहम्मद गजनी का वंशज हूं; इसलिए मैं पुनः सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दूंगा ।’ उसके पश्चात वर्ष २०२३ में ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशिदी ने क्षोभजनक वक्तव्य दिया, ‘गजनी ने सोमनाथ मंदिर गिराकर कोई चूक नहीं की ।’ यह बताने का तात्पर्य यही है कि स्वतंत्रतापूर्व के काल से लेकर आज तक इस मंदिर का विरोध करनेवाले कांग्रेसी तथा जिहादी प्रवृत्ति के लोगों में विलक्षण समानता दिखाई देती है । तो क्या ऐसे लोगों को ‘आधुनिक काल के गजनी’ कहा जाए ?
आधुनिक गजनियों के कृत्य !
सोमनाथ मंदिर पर किए पहले आक्रमण को १ सहस्र वर्ष पूरे हुए, उस उपलक्ष्य में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ आयोजित किया गया । इसके कारण श्री सोमनाथ के प्रति प्रत्येक हिन्दू का मन कृतज्ञता से भर आया; परंतु दूसरी ओर औरंगजेब एवं गजनी द्वारा किए हिन्दूद्वेषी दुष्कृत्य आज भी जारी हैं, इस वास्तविकता को अस्वीकार नहीं किया जा सकता । आज के जिहादी उनकी धरोहर को आगे बढा रहे हैं । ये लोग देश-विदेशों के, विशेषकर पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि इस्लामी देश के हिन्दुओं के मंदिरों पर प्रतिदिन आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर रहे हैं, देवताओं की मूर्तियों पर मूत्रविसर्जन कर उन्हें भ्रष्ट कर रहे हैं, मूर्तियों की तोडफोड कर उनका घोर अनादर कर रहे हैं, लव जिहाद द्वारा हिन्दू माता-बहनों का शीलभंग कर रहे हैं, बलपूर्वक हिन्दुओं का धर्मांतरण कर रहे हैं तथा धर्म पूछकर हिन्दुओं को मौत के घाट उतार रहे हैं । आधुनिक गजनियों के इन दुष्कृत्यों को कानूनी पद्धति से रोकना आवश्यक है । इतिहास में हुए अन्याय से शिक्षा लेकर, भविष्य में संभावित अन्याय के विरुद्ध लडने की प्रेरणा लेना आवश्यक है । औरंगजेब एवं गजनी ने हिन्दुओं के आस्थाकेंद्रों को नष्ट करने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया; परंतु वर्तमान समय के आधुनिक औरंगजेब एवं गजनी उनसे भी १०० कदम आगे चलकर सनातन धर्म को ही नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं । उसके लिए दंगे भडकाना, बमविस्फोट कराने से लेकर उपरोक्त उल्लेखित दुष्कृत्य करना, मानो उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य ही बना लिया है । इसमें अनेक देशद्रोही उनका साथ दे रहे हैं । देवता, देश एवं धर्म के विरुद्ध बोलनेवालों को ‘आधुनिकतावादी’ नामक गिरोह से तत्काल अभयदान मिलता है । केवल इतना ही नहीं, अपितु इससे पहले समय-समय पर उन्हें राजनीतिक स्तर पर भी सहानुभूति मिल चुकी है । इन सभी प्रवृत्तियों का विरोध केवल सनातन धर्म के प्रति ही नहीं, अपितु इस देश के प्रति भी है । अतः सरकार को अभी ऐसे लोगों पर लगाम लगानी चाहिए । दूसरी ओर देवता, देश एवं धर्म पर हो रहे आघातों के विरुद्ध हिन्दुओं को जागृत करने हेतु पहले हिन्दुओं में जागरूकता लाना आवश्यक है ।
सनातन अविनाशी है !

इसके लिए इतिहास को पुनर्जीवित करना महत्त्वपूर्ण है, तथापि आधुनिकता के नाम पर इतिहास को विस्मृति में ढकेलने का, साथ ही ‘जो कुछ हुआ, उसे भूलकर आगे बढिए’, निरंतर ऐसे सुझाव देने का प्रयास किया जाता है । जिन्हें स्वयं का इतिहास ज्ञात नहीं होता, वे भविष्य में स्वयं की रक्षा नहीं कर सकते, यह भी इतिहास ही है; इसे ध्यान में रखना होगा । ऐसी स्थिति में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ जैसे कार्यक्रम हिन्दुओं की अस्मिता को जगानेवाले उपक्रम सिद्ध होते हैं । ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ यह सिद्ध करता है कि काल चाहे कितना भी कठिन हो, सत्य (सनातन) कभी मिट नहीं सकता । अयोध्या का श्रीराम मंदिर, काशी का कायाकल्प तथा अब यह श्री सोमनाथ का गौरव समारोह; एक ‘सांस्कृतिक महासत्ता’ के उदय का आरंभ है । यह यात्रा भयमुक्त एवं अभिमान से युक्त हिन्दू समाज की निर्मिति की ओर जानेवाली है । सोमनाथ मंदिर के विध्वंस की घटनाओं का स्मरण दिलाने का अर्थ द्वेष फैलाना नहीं है, अपितु सत्य का भान कराना है । सत्य को स्वीकार किए बिना आत्मसम्मान उत्पन्न नहीं होता तथा आत्मसम्मान के बिना स्वाभिमान उत्पन्न नहीं होता । इसके लिए हमें इतिहास से बोध लेकर वर्तमान में सजग एवं संगठित रहना आवश्यक है । उसके लिए श्री सोमनाथ के आशीर्वाद हमारे साथ रहेंगे । देवता के देवत्व अपनेआप प्रकट होते हैं; परंतु मनुष्य को अपना पराक्रम दिखाना पडता है । हम देश के १०० करोड हिन्दू मिलकर ऐसी धाक जमाएंगे कि औरंगजेब, गजनी आदि के उत्तराधिकारी सनातन धर्म, धर्मग्रंथ, देवता, संत, राष्ट्रपुरुष आदि की ओर वक्रदृष्टि डालने का साहस भी न कर पाएं । ऐसा करने से धर्मावलंबियों द्वारा पीढी दर पीढी ‘सनातन स्वाभिमान पर्व’ मनाया जाएगा !
| सनातन धर्म, धर्मग्रंथ, देवता, संत, राष्ट्रपुरुष आदि की ओर वक्रदृष्टि से देखने का किसी का साहस नहीं होगा, ऐसा भय हिन्दुओं द्वारा निर्माण करना आवश्यक ! |
Panchkula Bomb Threat : पंचकुला (हरियाणा) महापौर कार्यालय सहित हरियाणा तथा दिल्ली के मंदिरों को बम से उडाने की धमकी ।
Temple Bonds : केन्द्र सरकार ‘टेम्पल बॉन्ड्स’ योजना लाने की तैयारी में !
मद्रास उच्च न्यायालय ने विद्यालय की भूमि पर चर्च के अनाधिकृत निर्माण पर रोक लगाई।
Assam Hindu Murder : नलबाड़ी (असम) में हिन्दू युवक की मुसलमानों द्वारा हत्या ।
मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।
महाराष्ट्र में २ जून से आंदोलन, घंटानाद, महाआरती एवं हस्ताक्षर अभियान आरंभ होगा ।