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वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – काशी के मणिकर्णिका घाट पर वर्तमान में बडे स्तर पर जीर्णोद्धार (नूतनीकरण) का कार्य चल रहा है । इसके कारण कुछ पुरानी संरचनाओं को तोडने एवं मूर्तियों को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है । इस संदर्भ में कुछ कथित चित्र सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए हैं, जिनके माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की जा रही है । इस प्रकरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर पुलिस ने नकली (फर्जी) चित्र प्रसारित करने के आरोप में ८ लोगों को बंदी बना लिया है ।
१. सरकार के अनुसार, मणिकर्णिका घाट को विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है । इसके लिए पहले चरण में ३५ करोड रुपये स्वीकृत किए गए हैं । योजना में एक बडा प्लेटफॉर्म बनाना समाहित है, जिससे एक साथ कई शवों का अंतिम संस्कार अधिक सुव्यवस्थित एवं सम्मानजनक पद्धति से किया जा सके । प्रशासन का दावा है कि यह सारा कार्य आस्था को ध्यान में रखकर ही किया जा रहा है ।
२. मणिकर्णिका मार्ग के कार्य के अंतर्गत एक चबूतरा हटाया गया । उस समय वहां स्थित कुछ मूर्तियों के नीचे गिरने के कथित चित्र सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के उपरांत विवाद आरंभ हो गया । इस पर विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की । विवाद बढने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं मणिकर्णिका घाट का दौरा किया तथा कार्य का निरीक्षण किया । उन्होंने अधिकारियों से पूरी जानकारी ली एवं कार्य की प्रगति देखी । उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी मंदिर या मूर्ति को क्षति नहीं पहुंचाई गई है ।
३. योगी आदित्यनाथ ने कहा, “सोशल मीडिया पर वर्तमान में जो प्रचार हो रहा है वह भ्रामक है तथा कुछ चित्र AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करके बनाए गए हैं, इसलिए वे लोगों को अनुचित जानकारी दे रहे हैं । मंदिर नष्ट होने या मूर्तियों की क्षति के दावे पूरी तरह अफवाह हैं । सरकार कभी भी काशी की आस्था एवं विरासत का अपमान नहीं करेगी ।”
मणिकर्णिका घाट का वर्तमान स्वरूप
मणिकर्णिका तीर्थ काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निकट में स्थित है । यहां मसान मंदिर, तारकेश्वर मंदिर एवं रत्नेश्वर मंदिर जैसे कई मंदिर अभी भी अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित हैं । केवल मणिकर्णिका घाट का एक चबूतरा तथा कुछ पुरानी संरचनाएं हटाई गई हैं । नया प्लेटफॉर्म बनाने के लिए उन्हें हटाना आवश्यक था ।
घाट के पुजारियों का आरोप
घाट के पुजारी एवं स्थानीय पुरोहित इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं । उनके अनुसार, ‘मढी’ कोई मंदिर नहीं था, फिर भी उस पर स्थित मूर्ति एवं उसकी उपस्थिति लोगों की श्रद्धा से जुडी थी । पुरोहितों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं; परंतु विरासत को नष्ट किए बिना उसे सहेजा जा सकता था ।
मणिकर्णिका तीर्थ के विकास का कारण
मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था लंबे समय से अव्यवस्थित थी । डोम राजा (विश्वनाथ चौधरी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विनती की थी कि ‘काशी कॉरिडोर’ के पश्चात मणिकर्णिका तीर्थ का विकास भी किया जाए; क्योंकि संकरी गलियां, लकडी की दुकानें, गंदगी एवं स्थान की कमी के कारण अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी कठिनाई होती थी । मानसून में स्थिति और भी बिगड जाती थी क्योंकि राख (भस्म) सडकों एवं घरों तक पहुंच जाती थी । इन समस्याओं के समाधान के लिए वर्ष २०२३ में प्रधानमंत्री ने मणिकर्णिका तीर्थ के विकास की आधारशिला रखी थी ।
नए मणिकर्णिका तीर्थ का स्वरूप
इस परियोजना का दायित्व ‘रूप फाउंडेशन’ के पास है । प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि पूरा प्लेटफॉर्म ३ सहस्र ९५० वर्ग मीटर आकार का होगा तथा ४ चरणों में काम पूरा होगा । प्रोजेक्ट पूरा होने के पश्चात एक साथ १९ शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा एवं परिजनों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ।
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