Christians Persecution Report : ईसाइयों के लिए सर्वाधिक संकटकारी १५ देशों की सूची में भारत १२ वें स्थान पर

  • ‘ओपन डोर्स’ संस्था के ‘वर्ल्ड वॉच लिस्ट २०२६’ प्रतिवेदन (रिपोर्ट) के निष्कर्ष

  • विश्वभर में ३९ करोड ईसाइयों पर हिंसा होने का दावा

वैटिकन सिटी – विश्वभर में ईसाई धर्मावलंबियों पर होने वाली हिंसा में बडी वृद्धि होने की बात सामने आई है । नवीनतम प्रतिवेदन के अनुसार, वर्ष २०२४ की तुलना में वर्ष २०२५ में ईसाइयों को बडे स्तर पर विभिन्न प्रकार के उत्पीडन एवं हिंसा का सामना करना पडा है । इस प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि लगभग ३८ करोड ८० लाख ईसाइयों पर अत्याचार हुए हैं । इसमें ईसाइयों के लिए १५ देशों को सर्वाधिक संकटकारी बताया गया है, जिनमें भारत को १२ वें स्थान पर रखा गया है । ‘ओपन डोर्स’ नामक संस्था ने वैश्विक अध्ययन के आधार पर ‘वर्ल्ड वॉच लिस्ट २०२६’ नाम से यह प्रतिवेदन प्रकाशित किया है । संस्था के निदेशक क्रिस्टियन नानी ने बताया कि वर्ष २०२५ में अत्यंत संकटकारी एवं रिकॉर्ड स्थिति पंजीकृत की गई है ।

भारत के विषय में प्रतिवेदन के विवादास्पद दावे

इस सूची में भारत को १२ वें स्थान पर रखते हुए १०० में से ८४ अंक दिए गए हैं । प्रतिवेदन में कहा गया है कि धर्मान्तरित होकर ईसाई बने व्यक्तियों को हिन्दू समाज की ओर से भेदभाव का सामना करना पडता है । प्रतिवेदन की प्रस्तुति में हिन्दू समाज के प्रति स्पष्ट पूर्वाग्रह दिखाई देता है । इसमें उल्लेख किया गया है कि भारत में धार्मिक राष्ट्रवादियों की दृष्टि में भारतीय होने का अर्थ ‘हिन्दू’ होना है तथा ईसाई धर्म के लिए यहां स्थान नहीं है । इसके परिणामस्वरूप, विशेष रूप से धर्मान्तरित लोगों के विरुद्ध व्यवस्थित भेदभाव एवं हिंसा होती है । सोशल मीडिया के कारण यह समस्या अधिक तीव्र हो रही है तथा अनुचित जानकारी बडी मात्रा में प्रसारित की जाती है तथा ईसाई धर्म के विषय में असत्य कथाएं फैलाई जाती हैं । प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि धर्म प्रचार का कार्य अत्यंत संकटकारी सिद्ध हो रहा है ।

ईसाइयों के लिए सर्वाधिक संकटकारी १५ देश

‘वर्ल्ड वॉच लिस्ट’ प्रतिवेदन के अनुसार, उत्तर कोरिया ईसाइयों के लिए सर्वाधिक संकटकारी देश सिद्ध हुआ है । इसके पश्चात सोमालिया, इरिट्रिया, लीबिया, अफगानिस्तान, यमन, सूडान, माली, नाइजीरिया, पाकिस्तान, ईरान, भारत, सऊदी अरब, म्यांमार एवं सीरिया को सम्मिलित किया गया है । सीरिया में हिंसा अत्यंत गंभीर स्तर पर पहुंच गई है । क्रिस्टियन नानी ने बताया कि सीरिया में ईसाई समाज संकट में है तथा वर्तमान में वहां केवल ३ लाख ईसाई शेष हैं, जो १० वर्ष पूर्व की तुलना में लाखों कम हैं ।

महिलाओं एवं बच्चों पर बडा प्रभाव

‘वर्ल्ड वॉच लिस्ट’ के अनुसार, ३८ करोड ८० लाख पीडित ईसाइयों में से २० करोड १० लाख महिलाएं अथवा लडकियां हैं । साथ ही, ११ करोड लोगों की आयु १५ वर्ष से कम है । प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि जिन देशों में ईसाइयों पर अत्याचार का स्तर अत्यंत गंभीर है, उनकी संख्या १३ से बढकर १५ हो गई है ।

उप-सहारा अफ्रीका में अत्यंत गंभीर स्थिति

१. अफ्रीका के देशों में ईसाइयों के विरुद्ध हिंसा में तीव्र वृद्धि हुई है । वर्ष २०२४ में ४,४७६ ईसाइयों की हत्या हुई थी, जबकि २०२५ में यह आंकडा ४,८४९ तक पहुंच गया है; अर्थात यहां प्रतिदिन औसत १३ हत्याएं होती हैं ।

२. नाइजीरिया इन हत्याओं का केंद्रबिंदु रहा है, जहां ३,४९० ईसाइयों की हत्या हुई है । यह संख्या विश्वभर में मारे गए ईसाइयों की लगभग ७० प्रतिशत है ।

३. उप-सहारा अफ्रीका में २०२५ में ईसाई होने के कारण ४,७४४ लोगों को बंदी बनाया गया है ।

४. अपहरण की घटनाओं में कमी बताई गई है । वर्ष २०२४ में ३,७७५ अपहरण दर्ज थे, जो २०२५ में ३,३०२ हैं ।

५. चर्च पर होने वाले आक्रमणों में भी कमी आई है; वर्ष २०२४ में ७,६७९ आक्रमण हुए थे, जबकि २०२५ में ३,६३२ आक्रमण दर्ज किए गए ।

६. ईसाई लडकियों के साथ बलात्कार तथा बलपूर्वक विवाह की घटनाओं में बडी वृद्धि हुई है । यह आंकडा वर्ष २०२४ के ३,९४४ से बढकर वर्ष २०२५ में ५,२०२ हो गया है ।

संपादकीय भूमिका 

  • विश्व या भारत का कोई भी संगठन हिन्दुओं के विषय में कभी ऐसा प्रतिवेदन प्रसिद्ध नहीं करता, यह लज्जास्पद है !
  • विश्वभर में सर्वाधिक ईसाई राष्ट्र होने के उपरांत भी यदि ईसाइयों पर अत्याचार हो रहे हैं, तो हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों का कौन विचार करेगा ?
  • भारत में ईसाइयों पर अत्याचार होते हैं, यह सबसे बडा ढोंग (दुष्प्रचार) है । भारत में ईसाई मिशनरियों, ईसाइयों के विद्यालयों एवं ईसाई नक्सलियों द्वारा हिन्दुओं का मानसिक एवं शारीरिक उत्पीडन होता है, इस पर भी बोलना अब आवश्यक है !