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वॉशिंगटन डीसी (अमेरिका) – जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका के साथ व्यापार में २५ प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, ऐसी घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने की है । ट्रम्प ने कहा कि, “यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा ।” दूसरी ओर, व्हाइट हाउस की ओर से इस शुल्क को लेकर अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है ।
🇺🇸 U.S. President Donald Trump announces a 25% import duty on countries trading with Iran.
🇮🇳 India is among them.
This is economic coercion, not diplomacy.The world must unite and push back; collective resistance is the only way to end Trump’s bullying tactics. 💥🌍
PC:… pic.twitter.com/uWW3fs2FeC— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) January 13, 2026
अमेरिका पहले ही ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है । ईरान के साथ व्यापार करने वाले प्रमुख देशों में चीन, संयुक्त अरब अमीरात एवं भारत सम्मिलित हैं । यदि यह शुल्क लागू होता है, तो इन देशों के अमेरिका के साथ व्यापार पर प्रभाव पड सकता है । विश्व बैंक के आंकडों के अनुसार, वर्ष २०२२ में ईरान ने १४७ देशों के साथ व्यापार किया था ।
ईरान में हिंसक आंदोलनों में अब तक ६४८ लोगों की मृत्यु !

ईरान में पिछले १७ दिनों से सरकार एवं सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के विरोध में विभिन्न स्थानों पर आंदोलन चल रहे हैं । ये आंदोलन आर्थिक संकट से प्रारंभ होकर अब सत्ता के विरोध तक पहुंच गए हैं । नॉर्वे की एक मानवाधिकार संस्था के अनुसार, इन आंदोलनों में अब तक ६४८ लोगों की मृत्यु हो चुकी है एवं सहस्त्रों लोग घायल हुए हैं । मृतकों में ९ नाबालिग बच्चे भी सम्मिलित हैं । इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पा रही है, ऐसा संस्था ने स्पष्ट किया है । मृतकों की संख्या ६ सहस्त्र तक पहुंचने की आशंका जताई गई है । ईरानी सरकार की ओर से मृत या घायल लोगों की कोई आधिकारिक संख्या घोषित नहीं की गई है ।
ईरान खतरे की सीमा पार कर रहा है ! – ट्रम्प
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि, ईरान सरकार प्रदर्शन रोकने के लिए ख़तरे की सीमा पार कर रही है । अमेरिका कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है । ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत का प्रस्ताव रखा है एवं बैठक सुनिश्चित करने पर चर्चा चल रही है । यद्यपि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए अमेरिका को पहले कार्रवाई करनी पड सकती है, क्योंकि मृतकों की संख्या बढ रही है एवं लोग बंदी बनाए जा रहे हैं ।
भारत–ईरान व्यापार का महत्व कितना ?१. अमेरिका की संस्था ‘ओईसी’ (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष २०२४-२५ में भारत एवं ईरान के बीच १.६८ अरब डॉलर (लगभग १४ से १५ सहस्त्र करोड रुपये) का व्यापार हुआ । इसमें भारत का निर्यात अधिक मूल्य का रहा । २. भारत ने मुख्य रूप से बासमती एवं अन्य प्रकार के चावल, चाय, कॉफी, चीनी, दवाइयां एवं रसायन, दालें, भारी मशीनरी, विद्युत उपकरण एवं आभूषणों का निर्यात किया । ३. वहीं ईरान से भारत ने सूखे मेवे, जैविक एवं अजैविक रसायन, कुछ खनिज एवं कांच से निर्मित उत्पाद आयात किए । ४. अन्य देशों की तुलना में भारत का ईरान के साथ व्यापार अत्यंत कम है । अमेरिका एवं चीन भारत के सबसे बडे व्यापारिक सहभागी हैं एवं ईरान की तुलना में भारत उनके साथ लगभग १२० गुना अधिक व्यापार करता है । कनाडा भारत के व्यापारिक साझेदारों में लगभग २०वें स्थान पर है, इतने पर भी कनाडा के साथ भारत का व्यापार ईरान की तुलना में कम से कम ८ गुना अधिक है । ५. व्यापार से अधिक भू-राजनैतिक स्थिति एवं समीकरणों को देखते हुए ईरान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भू-राजनैतिक सहभागी है । पाकिस्तान को संतुलित करने के लिए भारत एवं ईरान, ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए प्रयासरत हैं । यदि भू-राजनीति को दुर्लक्ष किया जाए, तो भारत द्वारा ईरान के साथ व्यापार रोकने से विशेष हानि नहीं होगी, किन्तु अमेरिका द्वारा लगाया गया अतिरिक्त आयात शुल्क भारत के लिए हानिकारक हो सकता है । यद्यपि, यह भी सत्य है कि भारत अमेरिका की दादागिरी के सामने झुकेगा नहीं । |
संपादकीय भूमिकाट्रम्प की दादागिरी को तोडने के लिए विश्व के देशों को एकजुट होकर प्रयास करना आवश्यक है, ऐसा ही चित्र दिखाई देता है ! |
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