Kolhapur Public toilets : महानगरपालिका क्षेत्र के सार्वजनिक स्वच्छतागृहों को तत्काल सुधारें तथा उत्तरदायित्व सुनिश्चित कर कार्रवाई करें !

कोल्हापुर के सार्वजनिक मूत्रालयों की दुःस्थिति की पृष्ठभूमि पर हिन्दू विधिज्ञ परिषद का महापालिका आयुक्त को पत्र

कोल्हापुर शहर में स्थित सार्वजनिक शौचालयों एवं मूत्रालयों की दुःस्थिति

कोल्हापुर, १३ जनवरी (संवाददाता) : स्वच्छतागृह किसी भी शहर की अति आवश्यक सुविधा है तथा यह सुविधा सर्वत्र एवं अच्छी स्थिति में होनी आवश्यक है । ऐसा होते हुए भी साढेतीन शक्तिपीठों में से एक श्री महालक्ष्मीदेवी का मंदिर जिस कोल्हापुर शहर में है, उस कोल्हापुर शहर में महानगरपालिका, बिंदू चौक, मुंबई उच्च न्यायालय का सर्किट बेंच, छत्रपति प्रमिलाराजे परिसर, शाहूपुरी, राजारामपुरीसहित शहर के अनेक महत्त्वपूर्ण तथा भीडवाले स्थान पर जो सार्वजनिक शौचालय एवं मुत्रालयों की स्थिति अत्यंत गंभीर है, ऐसा ध्यान में आया । इस संदर्भ में महापालिका प्रशासन ने पूछने पर ‘स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उनकी स्वच्छता करते हैं’, ऐसा उत्तर दिया गया है । इन शौचालयों की स्थिति देखने पर ‘ये कर्मचारी निश्चितरूप से क्या स्वच्छता करते हैं ?’, यह प्रश्न मन में आता है । अतः कोल्हापुरवासियों के स्वास्थ्य से संबंधित इस समस्या के संदर्भ में अर्थात ही सार्वजनिक स्वच्छतागृहों में तत्काल सुधार किए जाएं तथा उनकी दुःस्थिति का उत्तरदायित्व सुनिश्चित कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग हिन्दू विधिज्ञ परिषद ने कोल्हापुर के महापालिका आयुक्त को पत्र भेजकर की है ।

हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने पत्र में निम्न मांगें की हैं –

अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर

१. महापालिका प्रशासन सभी सार्वजनिक मूत्रालयों एवं स्वच्छतागृहों का निरीक्षण कर तत्काल उनकी स्वच्छता करें तथा आवश्यक निर्माणकार्य करे ।

२. इन स्थानों की पहचान की दृष्टि से आवश्यक मार्गदर्शक फलक लगाएं जाएं तथा इन सार्वजनिक मूत्रालयों एवं स्वच्छतागृहों का रखरखाव करनेवाले ठेकेदारों से इस पर होनेवाला खर्च वसूला जाए ।

३. इसप्रकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य की अनदेखी करनेवाले प्रशासनिक अधिकारियों की जांच कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ।

संपादकीय भूमिका

  • इसप्रकार पत्र देकर मांग करनी ही क्यों पडती है ? महापालिका प्रशासन स्वयं ही इतना सामान्य मूलभूत काम क्यों नहीं करती ?
  • संपूर्ण व्यवस्था हाथ में होते हुए भी महानगरपालिका प्रशासन को यह दुःस्थिति दिखाई क्यों नहीं देती ? स्वच्छतागृहों जैसी प्राथमिक एवं अतिआवश्यक सुविधाओं की यदि यह स्थिति हो, तो नागरिकों से कर वसूलकर वेतन लेनेवाले प्रशासनिक अधिकारी निश्चितरूप से करते क्या हैं ? इसके उत्तरदायी लोगों पर कठोर कार्रवाई करना ही अपेक्षित है !