हिन्दुओं को अपने खोए हुए भूप्रदेश पुन: जीतने के प्रयत्न करने चाहिए ! – स्वामी विज्ञानानंदजी, सह महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव का सत्र : सनातन राष्ट्र संकल्प संतसभा

स्वामी विज्ञानानंदजी

भारत मंडपम्, दिल्ली – विश्व हिन्दू परिषद के सह महामंत्री स्वामी विज्ञानानंदजी ने ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में उद्बोधन करते हुए कहा, ‘‘जो राष्ट्र हिन्दू जीवनपद्धति अपनाएगा, वह हिन्दू राष्ट्र बनेगा । स्वतंत्रता पूर्व भारत समृद्ध भारत था । सूर्य के उदय से अस्त तक का संपूर्ण भूप्रदेश हिन्दुओेंं के अधिपत्य में था । गतकाल में हमने सभी प्रदेश खो दिए हैं । आज हिन्दुओं की सत्ता भारत के कुछ ही राज्यों में है । इसलिए उन्हें केवल डांडिया, होली अथवा दिवाली जैसे त्योहारों में उलझने की अपेक्षा शेष प्रदेश पुन: जीतने के लिए प्रयत्न करने चाहिए । इससे हमारा देश केवल हिन्दू राष्ट्र ही नहीं, अपितु ‘रिपब्लिक हिन्दू राष्ट्र’ बनेगा ।’’

‘हिन्दुओं का सांस्कृतिक घोषणापत्र’, इस विषय पर बोलते समय स्वामीजी ने कहा ‘‘हिन्दू अत्यंत सहिष्णु बन गए हैं । शास्त्र बताता है, ‘शत्रु शरणागत भाव से भी आया, तो भी उस पर कभी दया नहीं करनी चाहिए ।’ शत्रु जैसा होगा, वैसा ही उसके साथ व्यवहार करना चाहिए; तो ही हमारे समाज और राष्ट्र की रक्षा होगी । यही धर्म है । इसलिए राष्ट्र की रक्षा के लिए पहले शत्रुबोध होना आवश्यक है ।

आगामी आपातकाल में रक्षा हेतु ईश्वर के भक्त बनें ! – सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी, धर्मप्रचारक, हिन्दू जनजागृति समिति

सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी

‘जब पृथ्वी पर अधर्म प्रबल होता है, तब शांति निर्माण करने हेतु युद्ध करना ही पडता है, उसी को ‘आपातकाल’ कहते हैं । वह बताकर नहीं आता, अपितु एक सुनिश्चित कालचक्र के अनुसार आता है । पिछले २-३ वर्षों से पूरे विश्व में युद्धजन्य स्थिति उत्पन्न हुई है । अनेक राष्ट्र युद्ध की दहलीज पर हैं । तीसरा विश्वयुद्ध कब आरंभ होगा, यह बताया नहीं जा सकता । पूर्व सेनाप्रमुख विपीन रावत के बताए अनुसार इस काल में भारत को केवल सीमाओं पर युद्ध नहीं लडना पडेगा, अपितु ढाई स्तर पर (चीन, पाकिस्तान तथा भारत में स्थित आंतरिक शत्रु) लडाई लडनी पडेगी । वर्तमान समय में भारतविरोधी शक्तियां विभिन्न माध्यमों से देश में अशांति फैलाने का प्रयास कर रही हैं । विभिन्न संत, द्रष्टा एवं सप्तर्षि द्वारा की गई भविष्यवाणी सत्य सिद्ध होती दिखाई दे रही है । उनके बताए अनुसार आपातकाल में युद्ध, बाढ, भूकंप, महामारी इत्यादि के प्रकोप से युक्त घोर आपातकाल आएगा तथा उसमें प्रचंड मनुष्यहानि होगी; परंतु ‘मेरे भक्त का विनाश नहीं होगा’, यह भगवान का वचन है । अतः आपातकाल से रक्षा होने हेतु हमें विभिन्न सुरक्षात्मक उपायों के साथ आध्यात्मिक साधना कर ईश्वर का भक्त बनना आवश्यक है ।’ ऐसा मार्गदर्शन हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने किया । ‘आगामी आपातकाल एवं सुरक्षात्मक उपाय’, इस विषय पर वे ऐसा बोल रहे थे ।

हिन्दू अपने वास्तविक शत्रु को पहचानकर छत्रपति शिवाजी महाराजजी के शौर्यपूर्ण मार्ग से कार्यरत हों ! – उदय माहुरकर, संस्थापक, सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन

‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में सनातन संस्था पर स्तुति-पुष्पों की वर्षा

‘हिन्दुओं को अपने वास्तविक शत्रु को पहचानना होगा । उसके लिए उन्हें कुछ कृतियां करनी चाहिए तथा छत्रपति शिवाजी महाराजजी के जीवन की घटनाओं से बोध लेकर उनके द्वारा अपनाए शौर्ययुक्त मार्ग से कार्य करना चाहिए’, ऐसा मार्गदर्शन ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ के संस्थापक तथा पूर्व सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकरजी ने किया । ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ की ‘सनातन राष्ट्र संकल्प संतसभा’ में ‘चक्रवर्ती सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज’, इस विषय पर वे ऐसा बोल रहे थे । समापन सत्र में उपस्थित अनेक संतों ने, साथ ही श्री. माहुरकरजी ने सनातन संस्था के कार्य का गौरवपूर्ण उल्लेख किया ।

श्री. माहुरकरजी ने आगे कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराजजी ने औरंगजेब को ५ बार क्षमापत्र भेजा तथा ५ बार संधि की; परंतु इस संधि की ३ शर्तें जब स्वराज स्थापना के उनके लक्ष्य में बाधा बनने लगी, तब महाराजजी ने संधि तोड दी । अफजल खान के योजनाबद्ध वध के कारण पूरे भारत में छत्रपति शिवाजी महाराजजी का दबदबा स्थापित हुआ । सूरत लूटने के उपरांत महाराजजी ने सिंधुदुर्ग एवं रायगड आदि गढ-किलों का निर्माण कर राष्ट्रहित साधा । औरंगजेब के कारावास में भी महाराजजी ने वहां के राजपूतों को अपना बना लिया था । छत्रपति शिवाजी महाराजजी की यही सफल राजनीति हमने अपनाई, तो सनातन राष्ट्र की स्थापना दूर नहीं है ।

सनातन संस्था भारत की एकमात्र सात्त्विक संस्था !

श्री. उदय माहुरकरजी ने कहा,

‘‘सनातन संस्था वास्तव में भारत की पहले क्रमांक की सात्त्विक संस्था है । सनातन संस्था द्वारा दिल्ली में आकर ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण घटना है ।

श्री. माहुरकरजी द्वारा रखे गए अन्य महत्त्वपूर्ण सूत्र

१. भारत की स्वतंत्रता के समय बैरिस्टर जिन्ना ने अलग पाकिस्तान मांगा; परंतु उनके द्वारा ‘भारत के मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए ?’, इस संबंध में दूसरा विकल्प रखा गया, उसे भी गांधी एवं नेहरू ने स्वीकार किया । उसके कारण पंथ पर आधारित स्वतंत्र देश बनकर भी दूसरा विकल्प चुने जाने के कारण भारत हिन्दू राष्ट्र नहीं बन पाया । यह हिन्दुओं के साथ किया गया बडा द्रोह था ।

२. इस देश में गांधीजी के विचारों के विषय में व्यापक चर्चा होनी चाहिए । गांधीजी के ‘संपूर्ण अहिंसा’ तथा ‘हिन्दुओं की बलि चढाकर हिन्दू-मुसलमान एकता’ के उनके विचार राष्ट्रघातक थे ।

३. हिन्दुओं को भावनाशील हिन्दुत्व के साथ, अपितु उससे भी अधिक महत्त्व क्रियाशील हिन्दुत्व को देना चाहिए !

४. देश को प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदीजी जैसा राष्ट्ररक्षा हेतु कठोर निर्णय लेनेवाला नेतृत्व मिलना हमारा सौभाग्य ही है !

सनातन राष्ट्र-स्थापना के कार्य में योगदान दें ! – प.पू. युधिष्ठिरलाल महाराजजी, पीठाधीश्वर, शदाणी दरबार, छत्तीसगढ

प.पू. युधिष्ठिरलाल महाराजजी

सनातन संस्था हिन्दुओं को सर्वांगीण धर्मशिक्षा देकर धर्मजागृति एवं संस्कृति संवर्धन का जो कार्य कर रही है, वह अद्वितीय है । सनातन संस्था के कार्य के कारण राष्ट्र बलशाली होगा । आज यहां सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में उपस्थित प्रत्येक धर्मप्रेमी को यहां से आगे अपने-अपने क्षेत्र में सनातन राष्ट्र की स्थापना का कार्य करने का सुसंकल्प लेना चाहिए ! उसके लिए आवश्यक संगठन खडा करना एवं क्रियाशील होना ही इस महोत्सव की सच्ची फलोत्पत्ति होगी’, ऐसा आवाहन छत्तीसगढ के ‘शदाणी दरबार’ के नौंवें पीठाधीश्वर प.पू. युधिष्ठिरलाल महाराजजी ने किया । महोत्सव के समापन के समय हुई ‘सनातन राष्ट्र संकल्प संतसभा’ में वे ऐसा बोल रहे थे ।

चरित्रवान लोग ही युद्ध जीत सकते हैं ! – पू. पवन सिन्हा गुरुजी, संस्थापक, पावन चिंतनधारा आश्रम

पू. पवन सिन्हा गुरुजी

‘चरित्रवान लोग ही धर्मयुद्ध कर सकते हैं । जिनके पास चरित्र नहीं है, वे युद्ध नहीं जीत सकते । भारत के पास चरित्र है, इसलिए पाकिस्तान के विरुद्ध के अनेक छोटे-बडे युद्धों में भारत को सफलता मिली । चरित्रनिर्माण सरल नहीं है तथा चरित्र का शिक्षा से कोई भी संबंध नहीं है । अनेक उच्च विद्याविभूषित लोग भ्रष्टाचारी हैं । वर्तमान शिक्षा युवकों में चरित्रनिर्माण नहीं कर सकती । उसके लिए शिक्षकों के पास समय नहीं है । देश में अनेक विद्यालय हैं, तब भी युवकों का चरित्र संकीर्ण हो रहा है । चरित्रनिर्माण के लिए समाज एवं राष्ट्र के प्रति प्रेम होना आवश्यक है । उसके लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा देनेसहित उनके सामने अच्छे आदर्श भी रखने आवश्यक हैं । उसके लिए उनमें जागृति लानी पडेगी’, ऐसा मार्गदर्शन ‘पावन चिंतनधारा आश्रम’ के संस्थापक पू. पवन सिन्हा गुरुजी ने ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ को संबोधित करते हुए किया । वे ‘सनातन राष्ट्र एवं युवकों में जागृति’ विषय पर मार्गदर्शन कर रहे थे ।

हिन्दुओेंं पर हो रहे अन्याय रोकने के लिए हिन्दवी स्वराज्य जैसा हिन्दू राष्ट्र ही चाहिए ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

रमेश शिंदे

‘आज भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेख है कि ‘यह देश सेक्युलर है’: परंतु संविधान की धारा २५ के अनुसार पंथ के आधार पर भेदभाव किया गया है । अर्थात अल्पसंख्यकों के लिए अलग नियम, अलग प्रावधान आदि किया गया है । सेक्युलर देश में ऐसे भेदभाव का क्या काम ? कांग्रेसकृत यह विरोधाभास १०० करोड हिन्दुओं के साथ किया गया धोखा है । इस प्रश्न के साथ हिन्दुओं पर विविध प्रकार से होनेवाले अन्याय रोकने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराजजी के धर्माधिष्ठित हिन्दवी स्वराज्य जैसा हिन्दू राष्ट्र स्थापित करना, यही रामबाण उपाय है । इसके लिए सक्रिय होने का संकल्प करने के लिए ही यह ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ है’, ऐसा क्षात्रतेजवर्धक वक्तव्य हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने दिया । वे ‘सनातन राष्ट्र की मांग के पीछे की भूमिका’ इस विषय पर बोल रहे थे ।